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पटना में दुर्गापूजा पंडालों की सुरक्षा जांच तेज, 50 से अधिक पंडालों का निरीक्षण; लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी


पटना, 18 अक्टूबर 2026। दुर्गापूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आग लगने की संभावित घटनाओं को रोकने के लिए पटना में अग्निशमन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। शहर के विभिन्न इलाकों में बनाए गए पूजा पंडालों का निरीक्षण कर अग्नि सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने आयोजकों को निर्धारित नियमों का पालन करने और कमियों को तत्काल दूर करने का निर्देश दिया है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाली पूजा समितियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

50 से अधिक पूजा पंडालों का निरीक्षण

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 17 अक्टूबर को अग्निशमन विभाग की टीम ने पटना शहरी क्षेत्र में 50 से अधिक पूजा पंडालों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कुछ स्थानों पर सुरक्षा से संबंधित कमियां पाई गईं। अधिकारियों ने पूजा समितियों को आवश्यक सुधार करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने को कहा।

अग्निशमन सेवा के डीआईजी मनोज कुमार नट ने डाकबंगला चौराहा और महावीर मंदिर के आसपास बने पंडालों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने लटकते बिजली के तारों को ठीक कराने, आग का खतरा बढ़ाने वाली सजावटी सामग्री से बचने और आपात स्थिति के लिए पानी से भरे ड्रम उपलब्ध रखने जैसे निर्देश दिए।

बिजली की वायरिंग और सजावट पर विशेष ध्यान

पूजा पंडालों में अस्थायी बिजली कनेक्शन, रोशनी और सजावट के लिए बड़ी संख्या में तारों का इस्तेमाल किया जाता है। यदि वायरिंग सही तरीके से नहीं की गई हो या तार खुले और ढीले हों, तो शॉर्ट सर्किट से आग लगने का खतरा बढ़ सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने आयोजकों को बिजली की वायरिंग सुरक्षित रखने, ज्वलनशील सजावटी सामग्री के इस्तेमाल से बचने और पंडाल के आसपास संभावित खतरे पैदा करने वाली वस्तुओं को हटाने का निर्देश दिया है।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसी आपात स्थिति में आग पर शुरुआती स्तर पर काबू पाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध होने चाहिए। साथ ही, श्रद्धालुओं की आवाजाही में बाधा नहीं होनी चाहिए और निकासी के रास्ते खुले रखे जाने चाहिए।

सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी

अग्निशमन विभाग ने पूजा समितियों को निर्धारित अग्नि सुरक्षा मानकों और विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा है। बड़े पंडालों के लिए जरूरी अग्नि सुरक्षा स्वीकृति तथा विद्युत सुरक्षा से संबंधित प्रमाणपत्रों की व्यवस्था भी नियमों के अनुसार सुनिश्चित करनी होगी।

इसके अलावा, पंडालों में पर्याप्त प्रवेश और निकास द्वार, प्रशिक्षित स्वयंसेवक तथा आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी जरूरी है। भीड़ अधिक होने की स्थिति में स्वयंसेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे श्रद्धालुओं को सुरक्षित रास्तों की ओर ले जाने और जरूरत पड़ने पर अग्निशमन कर्मियों की मदद करने में सहयोग कर सकते हैं।

नियम तोड़ने वालों पर हो सकती है कार्रवाई

अग्निशमन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमियां पाए जाने पर संबंधित पूजा समितियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों के मुताबिक, श्रद्धालुओं की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा और आयोजकों को निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को जल्द दूर करना होगा।

इस अभियान का उद्देश्य केवल नियमों की जांच करना नहीं, बल्कि त्योहार के दौरान किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को कम करना भी है। विभाग की टीमें पंडालों में सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा जारी रखे हुए हैं।

श्रद्धालुओं से भी सतर्क रहने की अपील

प्रशासन और अग्निशमन विभाग की तैयारियों के साथ श्रद्धालुओं की सतर्कता भी जरूरी है। पंडाल में प्रवेश करते समय भीड़ के दबाव से बचना, बिजली के खुले तारों से दूर रहना और आपातकालीन निकास मार्गों को अवरुद्ध नहीं करना चाहिए। आग या धुएं की स्थिति बनने पर घबराने के बजाय सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

दुर्गापूजा के दौरान पटना में बड़ी संख्या में लोग विभिन्न पंडालों में दर्शन करने पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षित बिजली व्यवस्था, आग बुझाने के साधन, पर्याप्त निकास मार्ग और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की मौजूदगी हादसों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

निष्कर्ष: पटना में दुर्गापूजा पंडालों की सुरक्षा जांच तेज होने से आयोजकों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अग्निशमन विभाग का जोर इस बात पर है कि श्रद्धालु सुरक्षित माहौल में पूजा-अर्चना कर सकें और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी रहे।

नोट: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर मौलिक शब्दों में तैयार किया गया है।