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एक होनहार कलाकार का असमय जाना, कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति, दिल में हमेशा रहेगी गुड्डन की याद : अविनाश देव


पलामू : कुछ लोग दुनिया से चले जाते हैं, लेकिन अपनी यादों, अपने व्यक्तित्व और अपनी कला के माध्यम से लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहते हैं। संजीव कुमार उर्फ गुड्डन उन्हीं लोगों में से एक थे।

स्वर्गीय संजीव कुमार उर्फ गुड्डन, कांग्रेस शिक्षा सेल के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष श्री श्याम नारायण सिंह जी के सुपुत्र थे। वे केवल एक युवा साथी ही नहीं, बल्कि कला और रंगमंच के प्रति समर्पित एक प्रतिभाशाली कलाकार थे। मासूम आर्ट ग्रुप के साथ जुड़कर उन्होंने नाटकों, फिल्मों और अन्य कलात्मक गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनके भीतर एक संवेदनशील कलाकार बसता था, जिसकी कला में समाज को देखने, समझने और अभिव्यक्त करने की अद्भुत क्षमता थी।

आज उनका इस दुनिया से यूँ अचानक चले जाना केवल उनके परिवार की ही नहीं, बल्कि मेदिनीनगर के कला जगत, रंगकर्मियों, बुद्धिजीवियों और उनके तमाम शुभचिंतकों की भी अपूरणीय क्षति है।

आज राजा हरिश्चंद्र घाट पहुँचकर दिवंगत गुड्डन जी की चिता पर लकड़ी अर्पित करते हुए उन्हें अंतिम नमन किया। उस क्षण मन व्यथित था, हृदय भारी था और आँखों के सामने एक ही सवाल था—आखिर इतनी कम उम्र में कोई अपना यूँ छोड़कर कैसे चला जाता है?

जिस उम्र में सपनों को उड़ान देनी थी, जिस उम्र में अपनी प्रतिभा से समाज और कला जगत को नई पहचान देनी थी, उसी उम्र में उनका यूँ चले जाना नियति की ऐसी पीड़ा है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।

गुड्डन जी, आपका जाना एक ऐसी रिक्तता छोड़ गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। मंच पर निभाए गए आपके किरदार, कला के प्रति आपका समर्पण और आपके साथ जुड़ी स्मृतियाँ हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।

इस दुःख की घड़ी में मैं शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ। हम सभी इस अपार दुःख में उनके परिवार के साथ खड़े हैं। ईश्वर उन्हें इस असहनीय पीड़ा को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

 हे परमपिता परमेश्वर! दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और इस नौजवान साथी को अपने श्रीचरणों में चिरशांति प्रदान करें।भावभीनी श्रद्धांजलि, गुड्डन जी!
आपकी स्मृतियाँ हमारे दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी।