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दिसंबर से बिहार की सरकारी बसों में लगेंगे CCTV कैमरे, ऑनलाइन कंट्रोल रूम से होगी निगरानी


पटना: बिहार में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में परिवहन विभाग नई पहल करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित योजना के तहत दिसंबर से राज्य की सरकारी बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों के माध्यम से बसों के भीतर की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और प्राप्त फुटेज ऑनलाइन कंट्रोल रूम तक भेजने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

इस पहल का प्रमुख उद्देश्य बसों में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और परिवहन सेवाओं की निगरानी को प्रभावी बनाना है। कैमरों से मिलने वाली रिकॉर्डिंग के जरिए किसी अप्रिय घटना या विवाद की स्थिति में संबंधित जानकारी जुटाना भी आसान हो सकेगा।

कंट्रोल रूम से रखी जाएगी नजर

योजना के अनुसार, बसों में लगाए जाने वाले सीसीटीवी कैमरों को ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। इससे संबंधित अधिकारियों को कंट्रोल रूम के माध्यम से बसों की गतिविधियों की जानकारी मिल सकेगी। किसी शिकायत या सुरक्षा संबंधी घटना की स्थिति में फुटेज की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

यात्रियों की सुरक्षा को मिलेगी प्राथमिकता

सार्वजनिक बसों में महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य यात्रियों की सुरक्षा महत्वपूर्ण विषय है। सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने से बसों के अंदर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने में सहायता मिल सकती है। इसके अलावा चोरी, दुर्व्यवहार और यात्रियों के बीच विवाद जैसी घटनाओं की जांच में भी रिकॉर्डिंग उपयोगी साबित हो सकती है।

परिवहन व्यवस्था में बढ़ेगी जवाबदेही

इस व्यवस्था का लाभ केवल यात्रियों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। बसों के संचालन और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की निगरानी में भी तकनीक की भूमिका बढ़ सकती है। इससे शिकायतों के निपटारे और परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है।

दिसंबर से योजना लागू करने की तैयारी

दिसंबर से कैमरे लगाने की प्रस्तावित प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसके विस्तार और संचालन की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। कैमरों की तकनीकी क्षमता, फुटेज सुरक्षित रखने की अवधि, ऑनलाइन निगरानी और यात्रियों की निजता से जुड़े नियमों का पालन भी जरूरी होगा।

यदि योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो बिहार की सरकारी बसों में सफर करने वाले यात्रियों को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।