पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के “तार्किक विसंगति” श्रेणी में चिह्नित मतदाताओं की न्यायिक जांच प्रक्रिया में अब तक जिन मामलों का निपटारा हुआ है, उनमें से लगभग 34 प्रतिशत नाम मतदाता सूची से हटाने योग्य पाए गए हैं।
राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के एक सूत्र के अनुसार, शुक्रवार रात तक न्यायिक जांच के लिए भेजे गए कुल मामलों में से लगभग 25 प्रतिशत मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
सूत्र ने बताया कि “तार्किक विसंगति” श्रेणी में कुल 60 लाख से अधिक मामलों की पहचान कर उन्हें न्यायिक जांच के लिए भेजा गया था। इनमें से लगभग 15 लाख मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, जो कुल मामलों का लगभग 25 प्रतिशत है। इन 15 लाख मामलों में से पांच लाख से अधिक मामलों को मतदाता सूची से हटाने योग्य पाया गया है, जो जांच पूरी हुए मामलों का लगभग 34 प्रतिशत है।
इसके साथ ही शुक्रवार रात तक कुल हटाए गए मतदाताओं की संख्या 63 लाख तक पहुंच गई है। इससे पहले पिछले वर्ष दिसंबर में प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में “मृत”, “स्थानांतरित”, “डुप्लीकेट” और “लापता” श्रेणियों में 59 लाख नाम पहले ही हटाए जा चुके थे।
जिन मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे, उन्हें उच्चतम न्यायालय के ताजा निर्देश के अनुसार अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील करने का अवसर दिया जाएगा।
सूत्र ने यह भी बताया कि इस प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के लिए कुल 732 न्यायिक अधिकारी कार्य कर रहे हैं, जिनमें झारखंड और ओडिशा से आए 100-100 अधिकारी भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया संतोषजनक गति से आगे बढ़ रही है और संभावना है कि इस संबंध में पहली पूरक सूची अगले सप्ताह जारी की जा सकती है।
गत सप्ताह भारत निर्वाचन आयोग का पूर्ण पीठ, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में कोलकाता आया था। उन्होंने मीडिया से बातचीत में विश्वास जताया था कि राज्य में इस वर्ष होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव से पहले न्यायिक जांच की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और सभी पात्र मतदाता चुनाव में मतदान कर सकेंगे।
न्यायिक जांच के लिए भेजे गए 60 लाख मामलों को छोड़कर पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जा चुकी है। उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार न्यायिक जांच की प्रगति के आधार पर पूरक सूचियां भी जारी की जाएंगी।
पश्चिम बंगाल : जांच संपन्न मामलों में 34 प्रतिशत नाम मतदाता सूची से हटाने योग्य पाए गए




