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होली पर गुरुद्वारा साहिब में सजा विशेष दीवान, कीर्तन व कथा से संगत हुई निहाल


श्री गुरु नानक सत्संग सभा की ओर से कृष्णा नगर कॉलोनी स्थित गुरुद्वारा साहिब में होली के पावन अवसर पर गुरुवार को विशेष दीवान सजाया गया। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरु घर की खुशियां साझा कीं।

कार्यक्रम की शुरुआत हजूरी रागी जत्था के भाई महिपाल सिंह ने आसा दी वार के कीर्तन से की। इसके बाद उन्होंने “आजु हमारे गृह वसंत गुन गाए प्रभ तुमी अनंत” तथा “थिर घर वैसहु हर जन पिआरे सतगुरु तुमरे काज सवारे” शबद का गायन कर संगत को भाव-विभोर कर दिया। मधुर कीर्तन सुनकर गुरुद्वारा परिसर भक्ति रस में डूब गया और संगत ने श्रद्धा के साथ गुरुबाणी का आनंद लिया।

इस दौरान गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी ज्ञानी जिवेन्द्र सिंह ने कथा वाचन करते हुए होला महल्ला की परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने वर्ष 1680 में किला आनंदगढ़ साहिब में इस पर्व की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य सिख समुदाय में वीरता, साहस और अनुशासन की भावना को सुदृढ़ करना था। उन्होंने कहा कि होली के रंग तभी सार्थक हैं जब जीवन में परमात्मा की भक्ति और सेवा का भाव भी हो।

दीवान का समापन श्री आनंद साहिब के पाठ, अरदास और हुकुमनामा के साथ हुआ। इसके बाद संगत के बीच कढ़ाह प्रसाद का वितरण किया गया। कार्यक्रम का समापन सुबह करीब 9:30 बजे हुआ।

इस अवसर पर संगत के लिए चाय-नाश्ते का लंगर भी चलाया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर सेवा की। कार्यक्रम का संचालन मनीष मिड्ढा ने किया, जबकि श्री गुरु नानक सत्संग सभा के अध्यक्ष अर्जुन देव मिड्ढा ने उपस्थित संगत को होली की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और सभी ने गुरुबाणी के साथ पर्व की खुशियां मनाईं।