BREAKING NEWS

logo

पलामू जिले के लेस्लीगंज थाना क्षेत्र में दो दिनों में दो बुजुर्गों की मौत, समाज के सामने कड़वे सवाल


पलामू जिले के लेस्लीगंज थाना क्षेत्र में दो दिनों में दो बुजुर्गों की मौत, समाज के सामने कड़वे सवाल

{संवाददाता: राम प्रकाश तिवारी}

पलामू जिले के लेस्लीगंज थाना क्षेत्र में बीते दो दिनों के भीतर हुई दो घटनाओं ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। कुंदरी गांव निवासी स्व. भगवती यादव के पुत्र सोहराई यादव (लगभग 70 वर्ष) बुधवार शाम से अचानक लापता हो गए थे। परिजन रातभर बेचैनी में उनकी तलाश करते रहे, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। गुरुवार सुबह जब गांव के लोग कुंदरी लाह बगान स्थित पिपराही तालाब के पास पहुंचे, तो पानी पर तैरती एक लाश ने सबको सन्न कर दिया। पहचान होने पर स्पष्ट हुआ कि वह सोहराई यादव ही हैं। इस दर्दनाक मंजर ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया।
इधर, इसी थाना क्षेत्र के गोराडीह टोली में एक दिन पहले ही एक अन्य बुजुर्ग ने घर की परिस्थितियों से तंग आकर फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। लगातार दो दिनों में हुई इन घटनाओं ने न केवल इलाके में मातम पसार दिया है, बल्कि समाज के सामने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
हर बार की तरह इन घटनाओं के बाद परिवार और गांव के लोग यही कहते सुनाई देते हैं कि “बुजुर्ग थोड़ा नर्वस था” या “दिमाग ठीक नहीं था।” लेकिन क्या वास्तव में समस्या केवल बुजुर्गों के दिमाग की है, या फिर हमारा सामाजिक तंत्र ही धीरे-धीरे संवेदनहीन होता जा रहा है?
ग्रामीणों के अनुसार, आजकल कई बुजुर्ग अकेलेपन, उपेक्षा और बदलते पारिवारिक व्यवहार से जूझ रहे हैं। उन्हें न तो पहले जैसा सम्मान मिल रहा है और न ही पर्याप्त देखभाल। धीरे-धीरे यह उपेक्षा मानसिक तनाव का रूप ले लेती है और वे भीतर ही भीतर टूटने लगते हैं।
ये घटनाएं सिर्फ खबर नहीं, बल्कि समाज के लिए एक आईना हैं। अगर अब भी हम नहीं चेते, तो आने वाले समय में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। अब वक्त है खुद से पूछने का—क्या सच में बुजुर्गों का “दिमाग नर्वस” हो रहा है, या हमारा “सिस्टम” ही संवेदनहीन होता जा रहा है।