सौर इंगोट्स और वेफर्स के लिए एएलएमएम प्रारूप का विस्तार 1 जून, 2028 से होगा प्रभावी
नई दिल्ली, 18 मार्च । केंद्र सरकार ने सौर सिल्लियों और वेफर्स के लिए अनुमोदित मॉडल और निर्माता सूची (एएलएमएम) फ्रेमवर्क का विस्तार किया है, जो 1 जून, 2028 से प्रभावी होगा। यह कदम सौर आपूर्ति श्रृंखला में घरेलू मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने, आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक सौर ऊर्जा उत्पादन केंद्र बनने की भारत की महत्वाकांक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को बताया कि यह भारत के सौर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा कि इस कदम से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ेगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और सौर मूल्य श्रृंखला में उच्च गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
मंत्रालय के मुताबिक एएलएमएम आदेश का विस्तार करते हुए इंगोट्स और वेफर्स के लिए एएलएमएम सूची-3 को शामिल किया गया है, जो 1 जून से प्रभावी होगा। पहले से चल रही परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए उपयुक्त प्रावधान किए गए हैं। एमएनआरई के इस आदेश के तहत मॉड्यूल और सेल के लिए पहले से लागू एएलएमएम सूचियों से अनिवार्य सोर्सिंग आवश्यकताओं को सौर आपूर्ति श्रृंखला में एक कदम आगे बढ़ाते हुए इंगोट्स और वेफर्स को भी शामिल किया गया है, जो वर्तमान में आयात पर अत्यधिक निर्भर हैं।
एएलएमएम की शुरुआत के बाद से घरेलू सौर ऊर्जा के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एएलएमएम सूची-I (सौर पीवी मॉड्यूल) 2021 में 8.2 गीगावाट से बढ़कर वर्तमान में लगभग 172 गीगावाट हो गया है। एएलएमएम सूची-II (सौर पीवी सेल), जिसे हाल ही में शुरू किया गया है, ये सात महीनों के भीतर ही 27 गीगावाट तक पहुंच गया है, जो घरेलू निवेश को प्रोत्साहित करने में इस ढांचे की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
घरेलू सौर विनिर्माण को मजबूत करने के लिए एएलएमएम ढांचे का विस्तार : जोशी





