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देवघर ब्लड सेंटर में 13 साल से कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत महिला की सेवा नियमित करने पर हाईकोर्ट का अहम आदेश


अमित कुमार,
रांची एक्सप्रेस ब्यूरो 

देवघर : झारखंड हाईकोर्ट ने 13 वर्षों से अनवरत सेवा दे रही कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवा नियमितीकरण के मामले में अहम आदेश दिया है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने मामले का निष्पादन करते हुए याचिकाकर्ता को स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख के समक्ष नया अभ्यावेदन देने का निर्देश दिया है, और विभाग को 8 सप्ताह के भीतर विधि सम्मत आदेश पारित करने को कहा है।

मामला W.P(S) No. 7603 of 2026 शिवरानी कुमारी सिंह बनाम झारखंड सरकार व अन्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ता शिवरानी कुमारी सिंह, उम्र 40 वर्ष, पति श्री कुमार माधव, निवासी पागल बाबा आश्रम के पास, जसीडीह, देवघर हैं। वे 28 जून 2013 से ओल्ड सदर अस्पताल, देवघर के ब्लड सेंटर में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर लगातार कार्य कर रही हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंजनी कुमार वर्मा ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता पिछले 13 वर्षों से भी अधिक समय से फिक्स मानदेय पर बिना किसी ब्रेक के कार्य कर रही है, लेकिन उन्हें नियमित कंप्यूटर ऑपरेटर (तृतीय वर्ग) को मिलने वाला न्यूनतम वेतनमान भी नहीं दिया जा रहा है। यह समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत का उल्लंघन है। अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के कई अहम फैसलों - जग्गो बनाम भारत संघ 2024, श्रीपाल बनाम नगर निगम गाजियाबाद 2025, धर्म सिंह बनाम यूपी सरकार 2025, भोला नाथ बनाम झारखंड सरकार 2026 और सुखेंदु भट्टाचार्य बनाम असम सरकार 2026 का हवाला देते हुए सेवा नियमितीकरण और सभी परिणामी लाभ देने की मांग की।

राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता वरुण प्रभाकर ने कहा कि चूंकि अभी तक काउंटर एफिडेविट दाखिल नहीं हुआ है, इसलिए याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत के निवारण के लिए चौथे प्रतिवादी के पास जाना चाहिए।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने दिनांक 23.09.2026 के आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता सभी संबंधित दस्तावेजों के साथ स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग (चौथे प्रतिवादी) के समक्ष नया अभ्यावेदन दायर करे। अभ्यावेदन प्राप्त होते ही विभाग रिकॉर्ड का सत्यापन कर लागू नियमों के अनुसार 8 सप्ताह के भीतर उचित आदेश पारित करे। यदि निर्णय याचिकाकर्ता के पक्ष में आता है तो 2 सप्ताह के भीतर परिणामी आदेश जारी किया जाए।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता अभी भी कार्यरत है, तो उसे काम से नहीं हटाया जाएगा और उसे वर्तमान में मिल रहा पारिश्रमिक मिलता रहेगा।