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जमशेदपुर के रेड जोन में बचे दो नक्सलियों पर पुलिस की नजर, मंगल और मालती की तलाश तेज


जमशेदपुर: झारखंड में लंबे समय से सक्रिय माओवादी नेटवर्क के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई और गिरफ्तारियों के बीच अब बचे हुए सक्रिय सदस्यों पर निगरानी बढ़ गई है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद मंगल उर्फ समीर उर्फ पांथ और उसकी पत्नी मालती को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियां बढ़ी हैं। दोनों के बंगाल-झारखंड सीमा से जुड़े जंगल क्षेत्रों में मौजूद होने की सूचना सामने आई है।

असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद बदला समीकरण

हाल में कथित माओवादी नेटवर्क के प्रमुख सदस्य असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान अब उन लोगों पर केंद्रित है, जिनके बारे में अभी भी जंगलों में सक्रिय रहने की जानकारी सामने आ रही है।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद मंगल और मालती को झारखंड में बचे प्रमुख सक्रिय नक्सली चेहरों के रूप में बताया गया है। रिपोर्ट में दोनों के घाटशिला के आसपास के जंगल क्षेत्रों में छिपे होने की बात कही गई है।

मंगल की पुरानी माओवादी पृष्ठभूमि

रिपोर्ट के मुताबिक, मंगल का माओवादी संगठन से जुड़ाव काफी पुराना है। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट में उसे माओवादी नेता किशनजी की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े दस्ते का सदस्य बताया गया है। बाद के वर्षों में उसने संगठन के भीतर अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं और जंगल क्षेत्रों में सक्रिय रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, मंगल वर्ष 2008 के आसपास संगठन के संपर्क में आया था। बाद में वह भूमिगत गतिविधियों में शामिल हो गया और संगठन में उसका नाम मंगल के रूप में सामने आया। उसके बारे में यह भी बताया गया है कि वह लंबे समय तक पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल तथा बंगाल-झारखंड सीमा से जुड़े इलाकों में सक्रिय रहा।

पत्नी मालती भी साथ होने की सूचना

सुरक्षा सूत्रों के हवाले से आई जानकारी के अनुसार, मंगल के साथ उसकी पत्नी मालती भी जंगल क्षेत्र में रह रही है। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट में दोनों के पास आधुनिक हथियार होने की सूचना का उल्लेख किया गया है। हालांकि, ऐसी सुरक्षा संबंधी सूचनाओं की स्वतंत्र सार्वजनिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक मंगल और मालती दोनों पर इनाम घोषित है। पुलिस रिकॉर्ड का हवाला देते हुए मंगल पर 5 लाख रुपये और मालती पर 2 लाख रुपये के इनाम की जानकारी दी गई है।

जंगल क्षेत्र में सुरक्षा निगरानी

मंगल और मालती की मौजूदगी की सूचना के बाद बंगाल-झारखंड सीमा से जुड़े जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है। खासकर उन इलाकों पर नजर रखी जा रही है जहां पहले माओवादी गतिविधियों की जानकारी सामने आती रही है।

हालांकि सुरक्षा अभियानों से जुड़ी वास्तविक तैनाती, तलाशी अभियान की दिशा या पुलिस की रणनीति जैसी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन गतिविधियों के बारे में केवल आधिकारिक रूप से जारी सूचनाओं या विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

संगठन के कमजोर पड़ने के बावजूद गतिविधियां जारी रहने की रिपोर्ट

हालिया रिपोर्टों में कहा गया है कि माओवादी संगठन के कई सदस्य या तो गिरफ्तार हो चुके हैं, आत्मसमर्पण कर चुके हैं या संगठन से अलग हो गए हैं। इसके बावजूद मंगल और मालती के जंगल में बने रहने की सूचना सामने आई है।

झारखंड में आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों के पुनर्वास को लेकर भी चुनौतियां सामने आई हैं। सामाजिक स्वीकार्यता, रोजगार और सामान्य जीवन में वापसी जैसे मुद्दे पुनर्वास प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं।

परिवार की मुख्यधारा में लौटने की अपील

हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, मंगल के माता-पिता ने उससे जंगल छोड़कर सामान्य जीवन में वापस लौटने की अपील की है। परिवार की ओर से उसे घर वापस आने और मुख्यधारा से जुड़ने का संदेश दिया गया है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐसे मामलों में आत्मसमर्पण एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जाता है, क्योंकि इससे लंबे समय से भूमिगत जीवन जी रहे कैडरों को कानूनी प्रक्रिया और पुनर्वास व्यवस्था के तहत सामान्य जीवन में लौटने का रास्ता मिल सकता है।

जमशेदपुर और आसपास के इलाकों के लिए क्या मायने?

जमशेदपुर से जुड़े पश्चिमी सिंहभूम, घाटशिला और बंगाल-झारखंड सीमा के जंगल लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी वाले क्षेत्रों में रहे हैं। हाल की गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण की घटनाओं के बाद सक्रिय नेटवर्क के कमजोर होने की खबरें सामने आई हैं, लेकिन बचे हुए सदस्यों की मौजूदगी की सूचना सुरक्षा व्यवस्था के लिए अब भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

फिलहाल मंगल और मालती की वास्तविक लोकेशन, उनकी मौजूदा गतिविधियों और पुलिस की अगली कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में दोनों के बारे में सामने आई सूचनाओं को खुफिया एवं मीडिया रिपोर्टों के आधार पर मिली जानकारी के रूप में देखना उचित होगा।

निष्कर्ष

असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद मंगल और मालती से जुड़ी रिपोर्टों ने एक बार फिर झारखंड के जंगल क्षेत्रों में बचे माओवादी नेटवर्क पर ध्यान केंद्रित किया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती अब ऐसे बचे हुए सक्रिय सदस्यों की पहचान, निगरानी और उन्हें मुख्यधारा में वापस लाने की प्रक्रिया से जुड़ी है। उपलब्ध रिपोर्टों में दोनों के खिलाफ इनाम की पुष्टि का उल्लेख है, जबकि उनकी मौजूदा गतिविधियों की विस्तृत स्वतंत्र पुष्टि अभी सीमित है।