छतरपुर को जिला बनाने की मांग तेज, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से ठोस पहल की अपेक्षा
32 वर्षों से अनुमंडल का दर्जा, अब जिला गठन की उठ रही मांग; प्रशासनिक सुविधा, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को लेकर लोगों में उम्मीद
पंचम कुमार - छतरपुर
छतरपुर (पलामू)। पलामू जिले के छतरपुर को जिला बनाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि जब तक छतरपुर को जिला का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक यहां समग्र और संतुलित विकास की परिकल्पना अधूरी रहेगी। ‘छतरपुर जिला–हमारी मांग, हमारा अधिकार’ के नारे के साथ उठ रही यह आवाज अब क्षेत्रीय विकास और प्रशासनिक सुविधा से जुड़ी एक बड़ी जनअपेक्षा बनती जा रही है।
16 सितंबर 1994 को छतरपुर अनुमंडल की स्थापना हुई थी। लगभग 32 वर्ष बीत जाने के बाद भी क्षेत्र के लोगों को जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से जुड़े कई प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। छतरपुर को जिला बनाए जाने से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था आम जनता के करीब आएगी, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, न्यायिक व्यवस्था, रोजगार, व्यापार और आधारभूत संरचना के विकास को भी नई दिशा मिल सकती है।
छतरपुर की भौगोलिक स्थिति भी जिला गठन की मांग को महत्वपूर्ण बनाती है। राष्ट्रीय राजमार्ग-98 (वर्तमान एनएच-139) पर स्थित छतरपुर झारखंड और बिहार के बीच आवागमन का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह क्षेत्र कई प्रखंडों और ग्रामीण इलाकों के लिए व्यावसायिक एवं आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बेहतर सड़क संपर्क और भौगोलिक स्थिति के कारण यहां जिला मुख्यालय विकसित होने की पर्याप्त संभावनाएं देखी जा रही हैं।
प्रस्तावित जिला के स्वरूप को लेकर क्षेत्र में एक नक्शा भी चर्चा में है। इसमें छतरपुर को जिला मुख्यालय बनाते हुए पिपरा, हरिहरगंज, नौडीहा बाजार, नावा बाजार, पांडू, हुसैनाबाद, हैदरनगर और मोहम्मदगंज जैसे क्षेत्रों को शामिल करने की परिकल्पना की गई है। इस प्रस्तावित स्वरूप में विभिन्न प्रखंडों की छतरपुर से अनुमानित दूरी भी दर्शाई गई है। हालांकि, यह अभी जनस्तर पर प्रस्तुत एक परिकल्पना है, सरकारी रूप से स्वीकृत सीमांकन नहीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला गठन होने से क्षेत्र में जिला स्तरीय कार्यालयों की स्थापना होगी। इससे प्रशासनिक कार्यों के लिए लोगों को दूर नहीं जाना पड़ेगा। जिला अस्पताल, न्यायिक संस्थान, पुलिस प्रशासन, शिक्षा एवं अन्य सरकारी संस्थानों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, व्यापारिक गतिविधियां और निजी निवेश भी बढ़ सकते हैं।
छतरपुर क्षेत्र ने अब तक कई विधायक, सांसद और विभिन्न पदों पर जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल देखा है। इसके बावजूद जिला गठन की मांग आज भी अधूरी है। जनता के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इतने वर्षों में क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण मांग को पूरा करने के लिए ठोस और निरंतर प्रयास क्यों नहीं हो सके। चुनाव के दौरान विकास के बड़े-बड़े वादे होते हैं, लेकिन क्षेत्र की बुनियादी जरूरतों और दीर्घकालिक विकास से जुड़े सवाल अब भी जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों को भी इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट भूमिका और जवाबदेही तय करनी चाहिए।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार से क्षेत्र के लोगों को विशेष अपेक्षा है। सरकार को छतरपुर जिला गठन की मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए प्रशासनिक स्तर पर पहल करनी चाहिए। इसके लिए जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति, राजस्व, उपलब्ध संसाधन, प्रशासनिक आवश्यकता और आर्थिक व्यवहार्यता का अध्ययन कराने के साथ एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जा सकती है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर जिला गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
छतरपुर को जिला बनाने की मांग किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष के हित से जुड़ी नहीं है। यह क्षेत्र के लाखों लोगों की सुविधा, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। अब समय आ गया है कि इस मांग को केवल चुनावी चर्चा तक सीमित न रखकर नीतिगत निर्णय की दिशा में आगे बढ़ाया जाए।
एक जिला – अनेक सपने, छतरपुर बने अपना।
छतरपुर की जनता को उम्मीद है कि राज्य सरकार इस पुरानी मांग पर सकारात्मक पहल करेगी और क्षेत्र को विकास की नई पहचान दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी। जिला मुख्यालय बनने से प्रशासन जनता के नजदीक होगा और विकास की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में भी सहूलियत मिल सकेगी।
लेखक पंचम कुमार एक युवा सामाजिक चिंतक के साथ साथ स्वतंत्र पत्रकार हैं।






