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बाहर की जाँच और कमीशनखोरी के खेल के खिलाफ जदयू प्रखंड अध्यक्ष प्रवीण तिवारी ने उठाई आवाज


​डाल्टेनगंज (पलामू):
पलामू जिले के मुख्य स्वास्थ्य केंद्र—सदर अस्पताल डाल्टेनगंज में इलाज कराने आने वाले गरीब और ग्रामीण मरीजों की सुध लेने वाला कोई नहीं बचा है। एक तरफ जहां सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के दावे कर रही है, वहीं धरातल पर सदर अस्पताल के भीतर कथित तौर पर 'कमीशन का एक बड़ा खेल' खुलेआम चल रहा है। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आर.के. रंजन और कुछ अन्य स्वास्थ्यकर्मियों पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे मरीजों को अस्पताल के बजाय बाहर निजी क्लिनिकों और सेंटरों से जांच कराने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
​इस गंभीर और जनहित से जुड़े मुद्दे पर पलामू जिला के जदयू प्रखंड अध्यक्ष प्रवीण तिवारी ने खुलकर आवाज उठाई है और स्वास्थ्य व्यवस्था की इस लाचारी के खिलाफ जिला प्रशासन से ठोस कदम उठाने की गुहार लगाई है।
​मशीनें खराब होने का बहाना, बाहर से जांच कराने का दबाव
​मिली जानकारी के अनुसार, सदर अस्पताल में पहुंचने वाले दूर-दराज के ग्रामीण मरीजों को अक्सर यह कहकर टरका दिया जाता है कि अस्पताल की मशीनें खराब हैं। इसके बाद मरीजों को डॉक्टर आर.के. रंजन के निजी क्लिनिक या उनके द्वारा चिन्हित बाहरी जांच केंद्रों पर भेजने का सिलसिला शुरू होता है। सबसे हैरानी की बात यह है कि यदि कोई मरीज बाहर किसी अन्य लैब से अपनी जांच करवाकर रिपोर्ट ले आता है, तो डॉ. आर.के. रंजन उसे देखने से ही इनकार कर देते हैं। मरीजों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा चक्र केवल और केवल डॉक्टरों और निजी जांच घर संचालकों के बीच कमीशन की मोटी कमाई का जरिया बनकर रह गया है।
​जदयू प्रखंड अध्यक्ष प्रवीण तिवारी ने अधिकारियों से लगाई गुहार
​मामले की गंभीरता को देखते हुए जदयू प्रखंड अध्यक्ष प्रवीण तिवारी ने पलामू के सिविल सर्जन (CS) महोदय एवं पलामू के उपायुक्त (DC) महोदय से पुरजोर आग्रह किया है कि वे इस मामले का तत्काल संज्ञान लें। उन्होंने कहा है कि सदर अस्पताल जैसी सरकारी संस्थाओं में गरीबों का इस तरह आर्थिक शोषण कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
​प्रवीण तिवारी के नेतृत्व में उठाई गई इस आवाज के बाद आम जनता और पीड़ितों द्वारा निम्नलिखित मांगें प्रमुखता से रखी गई हैं:
​सदर अस्पताल में खराब पड़ी सभी स्वास्थ्य मशीनों को अभिलंब दुरुस्त किया जाए ताकि मरीजों को बाहर न भटकना पड़े।
​बाहरी जांच केंद्रों और कुछ चुनिंदा चिकित्सकों के बीच चल रहे इस कथित कमीशनखोरी के नेटवर्क की उच्चस्तरीय जांच हो।
​मरीजों को बाहर की जांच कराने के लिए बाध्य करने वाले चिकित्सकों और कर्मियों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाए, ताकि पलामू के ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब जनता को राहत मिल सके।
​ क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेकर स्वास्थ्य माफियाओं पर लगाम कसेगा? पलामू की जनता अब इस पर त्वरित और ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठी है।