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न्यूज़क्लिक मामले में ईडी की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर फिर होगी कानूनी बहस


नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026: डिजिटल समाचार पोर्टल न्यूज़क्लिक और उसके संस्थापक-संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से जुड़े कथित विदेशी निवेश अनियमितता मामले में नया कानूनी मोड़ सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें न्यूज़क्लिक के खिलाफ दर्ज एक प्राथमिकी और उससे जुड़ी धनशोधन जांच को रद्द कर दिया गया था। अब इस मामले में शीर्ष अदालत की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

हाईकोर्ट के फैसले को ईडी ने दी चुनौती

दिल्ली हाईकोर्ट ने 29 मई 2026 को अपने फैसले में कहा था कि मामले में लगाए गए आरोप संबंधित आपराधिक अपराधों के आवश्यक कानूनी तत्वों को स्थापित नहीं करते। अदालत ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की ओर से दर्ज प्राथमिकी और उससे जुड़ी ईडी की धनशोधन कार्रवाई को रद्द कर दिया था।

ईडी ने अब इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। एजेंसी का कहना है कि हाईकोर्ट ने उसके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और कथित आपत्तिजनक सामग्री पर पर्याप्त विचार किए बिना कार्रवाई समाप्त कर दी। जांच एजेंसी ने यह भी सवाल उठाया है कि जांच के चरण में अदालत को आरोपों की कानूनी स्थिति पर विचार करना चाहिए था, न कि साक्ष्यों के अंतिम मूल्यांकन के आधार पर कार्यवाही खत्म करनी चाहिए थी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2020 में दर्ज एक प्राथमिकी से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने न्यूज़क्लिक की संचालन कंपनी पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड को मिले विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को लेकर कथित अनियमितताओं की जांच शुरू की थी।

जांच एजेंसियों का आरोप था कि कंपनी को अमेरिका की वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी से वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान लगभग 9.59 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश मिला था। आरोपों के मुताबिक, शेयरों के मूल्यांकन और निवेश की संरचना के जरिए उस समय लागू विदेशी निवेश संबंधी नियमों से बचने की कोशिश की गई थी। एजेंसियों ने यह भी दावा किया था कि निवेश की एक बड़ी राशि वेतन, परामर्श शुल्क, किराये और अन्य खर्चों के रूप में इस्तेमाल की गई।

इन आरोपों के आधार पर ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत भी मामला दर्ज किया था। हालांकि, ये जांच एजेंसियों के आरोप हैं; इन्हें अदालत द्वारा प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्यों रद्द की थी कार्रवाई?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को स्वीकार कर लेने पर भी धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात जैसे अपराधों के आवश्यक तत्व स्थापित नहीं होते। अदालत ने निवेश और कंपनी के खर्चों से जुड़े आरोपों का भी परीक्षण किया था।

अदालत के अनुसार, किसी कंपनी का विदेशी निवेश स्वीकार करना या वेतन, किराये और परामर्श सेवाओं पर खर्च करना अपने आप में आपराधिक कृत्य साबित नहीं करता। अपराध स्थापित करने के लिए संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक तथ्यों और आधारों का होना जरूरी है।

हाईकोर्ट ने यह भी माना था कि जब मूल प्राथमिकी ही रद्द कर दी गई, तो उसी मामले पर आधारित ईडी की धनशोधन कार्यवाही को जारी रखने का आधार नहीं बचता। इसी कारण अदालत ने संबंधित कार्रवाई समाप्त कर दी थी।

सुप्रीम कोर्ट में ईडी की प्रमुख दलीलें

ईडी ने अपनी चुनौती में हाईकोर्ट के फैसले की कानूनी व्याख्या पर सवाल उठाए हैं। एजेंसी का तर्क है कि प्राथमिकी रद्द करने के चरण में अदालत को जांच से जुड़े विवादित तथ्यों का अंतिम मूल्यांकन नहीं करना चाहिए था। उसका कहना है कि हाईकोर्ट के निर्णय से उसे मामले की जांच आगे बढ़ाने का अवसर नहीं मिला।

जांच एजेंसी ने फैसले सुनाने में हुई देरी का मुद्दा भी उठाया है। रिपोर्टों के अनुसार, हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में अपना निर्णय सुरक्षित रखा था और 29 मई 2026 को सुनाया। ईडी का दावा है कि इस देरी के कारण उसके कुछ महत्वपूर्ण तर्कों पर पर्याप्त विचार नहीं हुआ।

इन दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख और आगे की न्यायिक प्रक्रिया इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

अब आगे क्या होगा?

25 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ईडी की चुनौती सुप्रीम कोर्ट में दायर की जा चुकी है, लेकिन मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। शीर्ष अदालत पहले यह देखेगी कि याचिका पर किस प्रकार विचार किया जाना है और हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाले तर्कों पर आगे सुनवाई की जरूरत है या नहीं।

यह भी स्पष्ट रहना चाहिए कि न्यूज़क्लिक से संबंधित विदेशी निवेश और धनशोधन मामले की यह कार्यवाही अन्य अलग आपराधिक मामलों से भिन्न है। ईडी की याचिका दाखिल होने मात्र से हाईकोर्ट का फैसला स्वतः समाप्त नहीं होता।

निष्कर्ष

न्यूज़क्लिक मामले में ईडी की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती विदेशी निवेश नियमों, धनशोधन जांच और आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की न्यायिक शक्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाती है। एक ओर जांच एजेंसी हाईकोर्ट के फैसले को कानूनी रूप से गलत बता रही है, वहीं हाईकोर्ट ने उपलब्ध सामग्री और लागू कानून के आधार पर कार्रवाई समाप्त की थी। अब इस विवाद का अगला चरण सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके निर्णय पर निर्भर करेगा।