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खुला मंच व्हाट्सएप ग्रुप बना आवाज ऋचा मिश्रा को न्याय दिलाने की हुंकार



शहर में एक बार फिर दहेज प्रथा का कड़वा सच सामने आया है।ऋचा मिश्रा की असमय मौत ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ा है बल्कि पूरे समाज के सामने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं।लेकिन इस खामोशी के बीच खुला मंच व्हाट्सएप ग्रुप ने आगे बढ़कर पहल की है उसने यह संकेत दिया है कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले अभी भी मौजूद हैं।
सोमवार की सुबह खुला मंच व्हाट्सएप ग्रुप के अध्यक्ष नवदीप सिंह ऋषि,प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी नवीन तिवारी, कोषाध्यक्ष राहुल मिश्रा और सह-कोषाध्यक्ष रितेश कुमार टिंकू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ऋचा मिश्रा के मायके पहुंचा।इस दौरान मंच के वरिष्ठ सदस्य अमर सहाय,बबलू चावला,विजय गुप्ता,संकेत गुप्ता, अजीत पाठक सहित कई लोग मौजूद रहे।सभी ने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और यह भरोसा दिलाया कि न्याय की इस लड़ाई में मंच पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ा रहेगा।
परिजनों ने ऋचा की मौत को लेकर ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं।दहेज प्रताड़ना को लेकर मुकदमा दर्ज कराया गया है जो इस घटना की गंभीरता को स्पष्ट करता है।यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि उस सामाजिक बुराई का परिणाम है जो आज भी बेटियों के जीवन को निगल रही है।
गौरतलब है कि लगभग एक वर्ष पूर्व ही ऋचा की शादी ग्राम बनपुरवा निवासी और वर्तमान में जीएलए कॉलेज गेट के पास रहने वाले अभिषेक दूबे के साथ हुई थी।एक साल के भीतर ही एक बेटी की जिंदगी का इस तरह समाप्त हो जाना कई गंभीर सवालों को जन्म देता है क्या यह सिर्फ एक हादसा है या इसके पीछे एक सुनियोजित उत्पीड़न छिपा है?
खुला मंच व्हाट्सएप ग्रुप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि दहेज लोभियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। मंच का यह रुख न केवल पीड़ित परिवार के लिए संबल है बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है कि अब चुप रहने का समय बीत चुका है।
आज जरूरत है कि समाज इस तरह की घटनाओं पर सिर्फ दुख जताने तक सीमित न रहे बल्कि एकजुट होकर दहेज जैसी कुरीति के खिलाफ खड़ा हो। ऋचा मिश्रा की मौत एक चेतावनी है अगर अब भी आवाज नहीं उठी तो न जाने कितनी और बेटियां इस आग में झोंक दी जाएंगी।