मुंगेर विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रो डॉ बिमल मिश्रा ने दिया मुख्य व्याख्यान
रामगढ़। रामगढ़ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो डॉ बिमल कुमार मिश्रा ने मुंगेर विश्वविद्यालय में आयोजित गणित एवं वैज्ञानिक संगणना विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में व्याख्यान देकर रामगढ़ का मान बढ़ाया। उन्होंने अपने व्याख्यान में चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी डिजिटल प्रणालियों पर होने वाले साइबर हमलों तथा उनसे उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही इन चुनौतियों से निपटने में गणितीय मॉडलिंग और वैज्ञानिक संगणना की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
आर्यभट पर लिखी पुस्तक का हुआ लोकार्पण
सम्मेलन के दौरान प्रो मिश्रा की पुस्तक “जीरो बिफोर द सिंबल : आर्यभट एंड द मैथमेटिक्स ऑफ नथिंगनेस” का लोकार्पण मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति एवं बिहार सरकार के उच्च शिक्षा निदेशक ने संयुक्त रूप से किया। पुस्तक में महान भारतीय गणितज्ञ आर्यभट के गणितीय विचारों तथा शून्य की अवधारणा के ऐतिहासिक विकास पर विस्तार से चर्चा की गई है।
शिक्षण और शोध के क्षेत्र में लंबा अनुभव
प्रो डॉ बिमल कुमार मिश्रा गणितज्ञ एवं प्रतिष्ठित शोधकर्ता हैं। उन्होंने वर्ष 2001 से 2007 तक बीआईटीएस पिलानी में अध्यापन किया। इसके बाद वर्ष 2007 से 2017 तक बीआईटी मेसरा में गणित के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने संकाय मामलों के सहायक अधिष्ठाता और छात्र कल्याण अधिष्ठाता की जिम्मेदारी भी निभाई। नवंबर 2017 से वे विनोबा भावे विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों में प्राचार्य के रूप में कार्यरत हैं। वर्तमान में रामगढ़ कॉलेज का नेतृत्व कर रहे हैं।
140 से अधिक शोधपत्र, कई देशों में पेटेंट
उनका शोध कार्य गणितीय मॉडलिंग, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा उपकरणों के इंटरनेट, संक्रमण की गतिशीलता और अनुकूलन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में फैला हुआ है। उनके 140 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। वे कई शोधार्थियों का मार्गदर्शन भी कर चुके हैं। साइबर सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके नवाचारों को भारत सहित विभिन्न देशों में पेटेंट संरक्षण प्राप्त हुआ है। उनके पेटेंट में चिकित्सा उपकरणों के इंटरनेट की सुरक्षा और अन्य तकनीकी अनुप्रयोगों से जुड़े आविष्कार शामिल हैं।
क्षेत्र में उनके अकादमिक योगदान को रेखांकित करता है
प्रो मिश्रा का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित होना और उनकी पुस्तक का लोकार्पण गणित, आधुनिक तकनीक तथा भारतीय गणितीय विरासत के क्षेत्र में उनके अकादमिक योगदान को रेखांकित करता है।






