झारखंड के घाटशिला (जादूगुड़ा) क्षेत्र में यूरेनियम खनन से उत्पन्न स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं पुनर्वास संबंधी गंभीर मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग
रामगढ़, झारखंड | दिनांक: 6 मई 2026
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अंतर्गत जादूगुड़ा क्षेत्र में यूरेनियम खनन से प्रभावित आदिवासी समुदायों की समस्याओं को लेकर एक महत्वपूर्ण याचिका भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को प्रेषित की गई है। यह याचिका रामगढ़, के जी.पी. श्री संजीव कुमार अम्बष्ठ द्वारा भेजी गई है, जिसमें क्षेत्र में लंबे समय से जारी स्वास्थ्य, पर्यावरणीय क्षति एवं विस्थापन के मुद्दों पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
याचिका में बताया गया है कि यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा संचालित खनन गतिविधियों के कारण आसपास के गांवों में रहने वाले विशेषकर आदिवासी समुदाय गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार क्षेत्र में निम्नलिखित स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि देखी गई है:
कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी (फेफड़ा, पेट आदि)
बच्चों में जन्मजात विकृतियाँ
बांझपन एवं प्रजनन संबंधी समस्याएं
त्वचा रोग एवं दीर्घकालिक कमजोरी
श्वसन संबंधी बीमारियाँ
ग्रामीणों का कहना है कि ये बीमारियाँ पहले बहुत कम थीं, लेकिन खनन कार्य शुरू होने के बाद इनमें लगातार वृद्धि हुई है।
पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर भी गंभीर चिंताएँ जताई गई हैं। याचिका के अनुसार:
भूजल के प्रदूषित होने की आशंका
कृषि भूमि एवं फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव
खनन अपशिष्ट से उड़ने वाली धूल
मिट्टी एवं प्राकृतिक संसाधनों को दीर्घकालिक नुकसान
इसके अलावा, खदानों में कार्यरत श्रमिकों, विशेषकर ठेका मजदूरों, की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है। उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य जांच एवं जागरूकता का अभाव है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई परिवारों को अपनी पारंपरिक भूमि से विस्थापित होना पड़ा है, जिससे उनकी आजीविका, सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक पहचान पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
इन समस्याओं के समाधान हेतु राष्ट्रपति से निम्नलिखित प्रमुख मांगें की गई हैं:
स्वतंत्र राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का गठन
व्यापक स्वास्थ्य सर्वेक्षण एवं निःशुल्क उपचार
जल, मिट्टी एवं पर्यावरण की वैज्ञानिक जांच
श्रमिकों के लिए बेहतर सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ
विस्थापित परिवारों के लिए उचित मुआवजा एवं पुनर्वास
पारदर्शी रिपोर्टिंग एवं जनभागीदारी
आदिवासी समुदायों के लिए विशेष कल्याण पैकेज
राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा इस याचिका को झारखंड सरकार के मुख्य सचिव को आवश्यक कार्रवाई हेतु अग्रेषित कर दिया गया है। साथ ही याचिकाकर्ता को संबंधित विभाग से सीधे संपर्क करने की सलाह दी गई है।
यह मामला न केवल क्षेत्रीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह विकास और जनस्वास्थ्य के बीच संतुलन, पर्यावरण संरक्षण तथा आदिवासी अधिकारों से जुड़ा हुआ है।





