रांची: झारखंड की समृद्ध लोककला, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करने की दिशा में राजधानी रांची में 'कलाकृति हाट' की शुरुआत की गई है। केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने इसका उद्घाटन किया। इस पहल का उद्देश्य राज्य की पारंपरिक कलाओं को व्यापक पहचान दिलाने के साथ स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं बिक्री के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। कलाकृति हाट को स्थानीय हुनर और पारंपरिक कला के संरक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है। झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में पीढ़ियों से चली आ रही हस्तशिल्प परंपराओं को एक मंच पर लाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। झारखंड में सोहराय और कोहबर चित्रकला, डोकरा शिल्प, बांस से बने उत्पाद, लकड़ी की कलाकृतियां तथा जनजातीय हस्तशिल्प जैसी कई विशिष्ट कलाएं प्रचलित हैं। ऐसे उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में स्थानीय कारीगरों को कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कलाकृति हाट के माध्यम से शिल्पकारों को अपने हुनर और तैयार उत्पादों को लोगों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिल सकेगा। इससे पारंपरिक उत्पादों की मांग बढ़ने और कारीगरों की आय के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य नई पीढ़ी को झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प से परिचित कराना भी है। स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन मिलने से विलुप्त होने के कगार पर पहुंच रही कई पारंपरिक कलाओं को संरक्षित करने में मदद मिल सकती है। केंद्रीय मंत्री संजय सेठ द्वारा उद्घाटन किए जाने के बाद कलाकृति हाट से स्थानीय हस्तशिल्प क्षेत्र को नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि यहां कलाकारों को नियमित बिक्री, बाजार और प्रचार की सुविधाएं मिलती हैं, तो यह मंच झारखंड के कारीगरों के लिए आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से उपयोगी साबित हो सकता है।स्थानीय कलाकारों को मिलेगा बाजार
लोककला के संरक्षण पर जोर
रांची में शुरू हुआ कलाकृति हाट, झारखंड की लोककला और हस्तशिल्प को मिलेगा नया मंच






