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डीजीपी तदाशा मिश्रा ने पुलिस संस्मरण दिवस पर कहा पुलिस की नौकरी काफी कठिन है




विशेष संवाददाता
रांची : झारखंड में  को  पुलिस संस्मरण दिवस के अवसर पर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर राज्य के तीन शहीद पुलिसकर्मियों को याद किया गया।  पुलिस अधिकारियों ने उनके बलिदान को नमन करते हुए ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के सामने आने वाली चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद कर्तव्य निभाने के संकल्प को दोहराया। पुलिस संस्मरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा कि पुलिस की नौकरी बेहद कठिन है। इसमें तनाव, विपरीत परिस्थितियों और कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद पुलिसकर्मी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें अपने समय, क्षमता और व्यक्तिगत जीवन का त्याग भी करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी तमाम कठिनाइयों के बावजूद अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते। शहीदों की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य उनके योगदान और बलिदान को याद करना है। देशभर में पुलिस की विभिन्न इकाइयों और राज्यों में शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
इस वर्ष झारखंड में तीन पुलिसकर्मियों के शहीद होने का उल्लेख करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी। डीजीपी मिश्रा ने कहा कि देश और समाज की सुरक्षा में पुलिसकर्मियों का योगदान महत्वपूर्ण है। कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले जवानों का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। पुलिस स्मृति दिवस के माध्यम से वर्तमान पुलिसकर्मियों को भी उनके साहस, समर्पण और जिम्मेदारी का संदेश दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पुलिस संस्मरण दिवस के साथ राज्य में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। झारखंड में लाइसेंसी और गैर लाइसेंसी मिलाकर लगभग 5,600 दुर्गा पूजा पंडाल हैं। इन पंडालों में प्रतिमा विसर्जन की प्रक्रिया बुधवार से शुरू हुई है, जो लगभग तीन दिनों तक चलने की संभावना है।विसर्जन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्यभर में लगभग 14,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा मजिस्ट्रेट और पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है।  
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके जरिए पूजा पंडालों में किसी व्यक्ति के लापता होने की स्थिति में उसकी पहचान करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान करने में भी तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।