रांची: झारखंड में कर चोरी पर लगाम लगाने और सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी के लिए राज्य सरकार तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करने की तैयारी में है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से IRIS नामक एक विशेष सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना को अगले छह महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद टैक्स से जुड़े आंकड़ों का तकनीकी विश्लेषण कर संदिग्ध लेनदेन और कर चोरी की संभावित गतिविधियों की पहचान करना आसान हो सकता है। सरकार का प्रयास है कि पारंपरिक जांच प्रक्रिया के साथ आधुनिक डिजिटल तकनीक को जोड़कर राजस्व संग्रह की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाए। IRIS सिस्टम में AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की योजना है। इसके माध्यम से उपलब्ध कर संबंधी जानकारियों और वित्तीय आंकड़ों का विश्लेषण किया जा सकेगा। अलग-अलग रिकॉर्ड में मौजूद असामान्य अंतर और संदिग्ध पैटर्न की पहचान कर संबंधित विभाग को जांच के लिए संकेत मिल सकते हैं। इससे ऐसे मामलों को चिह्नित करने में मदद मिलने की उम्मीद है, जहां कारोबार या वित्तीय गतिविधियों से जुड़े आंकड़ों में संभावित विसंगतियां दिखाई देती हैं। हालांकि, किसी भी संदिग्ध मामले में अंतिम कार्रवाई से पहले विभागीय जांच और कानूनी प्रक्रिया आवश्यक होगी। राज्य सरकार इस तकनीकी परियोजना को छह महीने के भीतर विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। सिस्टम तैयार होने के बाद इसके उपयोग से कर प्रशासन की निगरानी क्षमता मजबूत करने की उम्मीद है। सरकार की इस पहल का व्यापक उद्देश्य टैक्स चोरी से होने वाले राजस्व नुकसान को कम करना और कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना है। AI आधारित निगरानी से अधिकारियों को जांच के लिए प्राथमिकता वाले मामलों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है। यदि IRIS सिस्टम निर्धारित समयसीमा में तैयार होकर प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो झारखंड में कर संग्रह और वित्तीय निगरानी की प्रक्रिया को डिजिटल रूप से अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा।आंकड़ों का विश्लेषण कर सामने आएंगी गड़बड़ियां
छह महीने में तैयार करने का लक्ष्य
राजस्व संग्रह बढ़ाने पर रहेगा जोर
झारखंड में AI से पकड़ी जाएगी टैक्स चोरी, सरकार तैयार कर रही IRIS सिस्टम






