नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 30 अक्टूबर को NVS-03 नेविगेशन उपग्रह के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है। इस मिशन का उद्देश्य भारत की स्वदेशी उपग्रह आधारित नेविगेशन व्यवस्था को और मजबूत बनाना है। हालांकि, प्रक्षेपण का अंतिम समय और मिशन की स्थिति ISRO की आधिकारिक घोषणा के आधार पर ही सुनिश्चित मानी जानी चाहिए। NVS-03, भारत की नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन (NavIC) प्रणाली से संबंधित उपग्रह श्रृंखला का हिस्सा बताया जा रहा है। NavIC को देश और उसके आसपास के निर्धारित क्षेत्र में सटीक स्थान संबंधी जानकारी तथा समय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है। स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली का उपयोग परिवहन, समुद्री गतिविधियों, आपदा प्रबंधन, सर्वेक्षण और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में किया जा सकता है। इस प्रणाली की क्षमता बढ़ने से भारत को स्थान निर्धारण और समय संबंधी सेवाओं के लिए विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है। इस तरह के मिशन में उपग्रह की कक्षा में सफल स्थापना के साथ उसके उपकरणों का निर्धारित तरीके से काम करना भी महत्वपूर्ण होता है। प्रक्षेपण के बाद उपग्रह की स्थिति और तकनीकी प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी ISRO के आधिकारिक अपडेट के माध्यम से सामने आएगी। क्यों अहम है यह मिशन? NVS-03 का प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और स्वदेशी नेविगेशन तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी वास्तविक उपलब्धियों का आकलन मिशन के परिणाम और आधिकारिक तकनीकी विवरण जारी होने के बाद किया जा सकेगा। प्रकाशन से पहले प्रक्षेपण की तारीख, उपग्रह के नाम और मिशन संबंधी विवरण की ISRO की आधिकारिक सूचना से पुष्टि कर लें।
भारत की नेविगेशन क्षमता बढ़ाने की तैयारी, ISRO शुक्रवार को लॉन्च करेगा NVS-03 उपग्रह






