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अक्टूबर में भारत के सेवा क्षेत्र ने पकड़ी रफ्तार, कारोबारी गतिविधियां चार महीने के उच्चतम स्तर पर; मजबूत मांग से बढ़े नए ऑर्डर


नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अक्टूबर महीने में सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। देश के सेवा क्षेत्र में कारोबारी गतिविधियों ने तेजी दर्ज की और वृद्धि चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। HSBC इंडिया सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में सेवा क्षेत्र का सूचकांक बढ़कर 55.8 पर पहुंच गया, जबकि सितंबर में यह 55.2 था। मजबूत घरेलू मांग, नए व्यावसायिक ऑर्डर और नए ग्राहकों के जुड़ने से इस क्षेत्र को गति मिली है।

चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा सर्विस PMI

HSBC इंडिया सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स के अक्टूबर के आंकड़े बताते हैं कि देश में सेवा क्षेत्र की गतिविधियां लगातार विस्तार कर रही हैं। अक्टूबर का 55.8 का स्तर जून के बाद सबसे मजबूत प्रदर्शन को दर्शाता है।

PMI सूचकांक में 50 से अधिक का आंकड़ा कारोबारी गतिविधियों में विस्तार और 50 से कम का स्तर संकुचन का संकेत देता है। इस लिहाज से अक्टूबर का आंकड़ा भारतीय सेवा क्षेत्र में सकारात्मक कारोबारी माहौल को दर्शाता है।

नए ऑर्डर और घरेलू मांग बने तेजी की प्रमुख वजह

अक्टूबर में सेवा कंपनियों को नए कारोबार के अधिक ऑर्डर मिले। बाजार में मांग बेहतर रहने, नए ग्राहकों के जुड़ने और कंपनियों के प्रचार अभियानों से बिक्री में वृद्धि दर्ज की गई।

घरेलू बाजार इस वृद्धि का सबसे बड़ा आधार रहा। सर्वेक्षण में शामिल सेवा क्षेत्र की सभी चार प्रमुख श्रेणियों में नए कारोबार और व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार हुआ।

वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि रियल एस्टेट और बिजनेस सर्विसेज में वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही।

निर्यात ऑर्डर की रफ्तार में आई कमी

घरेलू बाजार में मजबूत मांग के बावजूद अंतरराष्ट्रीय कारोबार से जुड़े संकेत कुछ कमजोर रहे। अक्टूबर में सेवा क्षेत्र के नए निर्यात ऑर्डर में वृद्धि की गति फरवरी 2023 के बाद सबसे धीमी दर्ज की गई।

इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय सेवा कंपनियों के लिए फिलहाल घरेलू बाजार अधिक मजबूत सहारा बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार इस क्षेत्र की भविष्य की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

लागत के दबाव में छह साल से अधिक समय बाद बड़ी राहत

अक्टूबर के सर्वेक्षण का एक महत्वपूर्ण पहलू लागत संबंधी दबाव में कमी आना भी रहा। सेवा कंपनियों की इनपुट लागत में वृद्धि अगस्त 2020 के बाद सबसे धीमी गति से हुई।

हालांकि, कुछ कंपनियों ने बिजली, कर्मचारियों के वेतन, कच्चे माल और परिवहन पर अधिक खर्च होने की जानकारी दी। इसके बावजूद कुल लागत वृद्धि की रफ्तार में कमी आई।

इसका असर कंपनियों की ओर से ग्राहकों से वसूले जाने वाले शुल्क पर भी दिखाई दिया। अक्टूबर में तीन प्रतिशत से कम सेवा कंपनियों ने अपनी बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की। इससे ग्राहकों पर बढ़ती कीमतों का दबाव अपेक्षाकृत सीमित रहा।

रोजगार वृद्धि की रफ्तार हुई धीमी

कारोबारी गतिविधियों में तेजी के बावजूद रोजगार के मोर्चे पर उतना उत्साहजनक प्रदर्शन नहीं रहा। अक्टूबर में सेवा क्षेत्र में नई नियुक्तियों की गति चार महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई।

सर्वेक्षण के अनुसार, कई कंपनियों के पास मौजूदा कामकाज संभालने के लिए पर्याप्त कर्मचारी थे। इसलिए नए कर्मचारियों की भर्ती अपेक्षाकृत सीमित रही।

यह स्थिति बताती है कि कारोबार में विस्तार और रोजगार सृजन की गति हमेशा समान नहीं होती। आने वाले महीनों में कंपनियों की मांग और कार्यभार के आधार पर नई नियुक्तियों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

संयुक्त PMI में भी हुआ सुधार

सेवा क्षेत्र की बेहतर गतिविधियों का असर देश के समग्र निजी क्षेत्र पर भी पड़ा। अक्टूबर में HSBC इंडिया कंपोजिट PMI आउटपुट इंडेक्स सितंबर के 55.9 से बढ़कर 56.2 हो गया।

यह विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों की संयुक्त कारोबारी गतिविधियों को दर्शाता है। अक्टूबर में निजी क्षेत्र का समग्र उत्पादन चार महीने की सबसे तेज गति से बढ़ा।

हालांकि, विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि की रफ्तार सितंबर के मुकाबले कुछ धीमी रही, लेकिन उसका प्रदर्शन विस्तार के दायरे में बना रहा।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या हैं इसके मायने?

भारत की अर्थव्यवस्था में बैंकिंग, बीमा, पर्यटन, परिवहन, आईटी, संचार, रियल एस्टेट और अन्य व्यावसायिक सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन क्षेत्रों में मांग बढ़ने से कारोबार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलता है।

अक्टूबर के आंकड़े संकेत देते हैं कि घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं और कारोबारियों की मांग मजबूत बनी हुई है। लागत के दबाव में कमी आने से कंपनियों को भी कुछ राहत मिल सकती है।

हालांकि, रोजगार वृद्धि और निर्यात ऑर्डर की धीमी गति ऐसे पहलू हैं, जिन पर आने वाले महीनों में नजर रखना जरूरी होगा।

निष्कर्ष: अक्टूबर में भारतीय सेवा क्षेत्र का PMI बढ़कर 55.8 पहुंचना देश की आर्थिक गतिविधियों के लिए सकारात्मक संकेत है। घरेलू मांग और नए ऑर्डर ने कारोबार को मजबूत बनाया है, जबकि लागत वृद्धि में कमी से कंपनियों को राहत मिली है। हालांकि, रोजगार सृजन और अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार अभी भी महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। यदि आने वाले महीनों में घरेलू मांग मजबूत बनी रहती है, तो सेवा क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि में अहम योगदान दे सकता है।