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विजयादशमी पर पीएम मोदी का संदेश, भारतीय संस्कृति के सम्मान और सामाजिक सद्भाव पर दिया जोर


नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026। विजयादशमी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय संस्कृति, पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक एकता के महत्व को रेखांकित किया। दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में उन्होंने लोगों से देश की सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान बनाए रखने और समाज में नफरत फैलाने वाली सोच के प्रति सतर्क रहने की अपील की।

सांस्कृतिक विरासत को संजोने का आह्वान

प्रधानमंत्री के संदेश का प्रमुख केंद्र भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण पर रहा। विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व का धार्मिक और सामाजिक महत्व बताते हुए सांस्कृतिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

देशभर में दशहरा उत्सव के दौरान रामलीलाओं, रावण दहन और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से भगवान राम के जीवन तथा आदर्शों को याद किया जाता है। ऐसे अवसर समाज को नैतिकता, कर्तव्य और सदाचार जैसे मूल्यों पर विचार करने का संदेश भी देते हैं।

नफरत फैलाने वाली सोच के खिलाफ सतर्कता

संबोधन में समाज के भीतर वैमनस्य और नफरत को बढ़ावा देने वाली मानसिकता के प्रति सजग रहने का संदेश भी सामने आया। सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और लोगों के बीच आपसी सम्मान को बढ़ावा देने की जरूरत ऐसे आयोजनों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

भारत जैसे विविधताओं वाले देश में अलग-अलग भाषाओं, परंपराओं और समुदायों के बीच संवाद तथा सहयोग सामाजिक एकता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। जिम्मेदार नागरिक व्यवहार और शांतिपूर्ण संवाद के जरिए सामाजिक मतभेदों को कम करने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।

विजयादशमी का क्या है महत्व?

विजयादशमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व भगवान राम की रावण पर विजय और धर्म की अधर्म पर जीत से जुड़ा है। देश के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। दिल्ली सहित कई शहरों में रामलीला मंचन और रावण दहन कार्यक्रम इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण होते हैं।

यह त्योहार लोगों को अन्याय, अहंकार और नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहने तथा सत्य और सदाचार के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।

निष्कर्ष: विजयादशमी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा यह संदेश भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान और सामाजिक सद्भाव के महत्व को सामने रखता है। पर्व का मूल भाव अच्छाई की जीत, नैतिक मूल्यों और समाज में आपसी सम्मान को मजबूत करना है।