नई दिल्ली/बाकू, 24 अक्टूबर 2026। भारत और अजरबैजान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के प्रयास तेज होते दिखाई दे रहे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 अक्टूबर को अजरबैजान की राजधानी बाकू में राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और विदेश मंत्री जेयहुन बैरामोव से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, परिवहन संपर्क और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के मुद्दों पर चर्चा हुई। यह यात्रा दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से बने तनाव को कम करने और आपसी संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठकों में दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। जयशंकर ने भारत और अजरबैजान की अर्थव्यवस्थाओं के बीच मौजूद पूरक अवसरों का उल्लेख करते हुए कहा कि द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को आगे बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं। दोनों पक्षों ने कारोबारी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने, व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान और नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार किया। ऊर्जा के अतिरिक्त दवा उद्योग, पर्यटन, डिजिटल सेवाओं और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में भी साझेदारी की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। भारत और अजरबैजान के आर्थिक संबंधों में तेल एवं गैस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बातचीत के दौरान दोनों देशों ने ऊर्जा सहयोग को और गहरा करने तथा दूसरे क्षेत्रों में भी आर्थिक साझेदारी का विस्तार करने पर जोर दिया। भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति के विविध स्रोत बनाए रखना महत्वपूर्ण है, जबकि अजरबैजान के पास तेल और गैस से जुड़ा मजबूत औद्योगिक आधार है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय से निवेश और कारोबारी अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि, इस यात्रा के दौरान किसी नए बड़े ऊर्जा समझौते की घोषणा की जानकारी उपलब्ध नहीं है। बैठक में अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (International North-South Transport Corridor—INSTC) पर भी चर्चा हुई। यह बहु-माध्यम परिवहन नेटवर्क भारत को ईरान, कैस्पियन क्षेत्र, रूस और आगे यूरोप के बाजारों से जोड़ने की क्षमता रखता है। इस गलियारे के माध्यम से माल की आवाजाही को अधिक प्रभावी बनाने पर भारत लंबे समय से जोर देता रहा है। अजरबैजान की भौगोलिक स्थिति इस परियोजना के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों देशों ने इस परिवहन नेटवर्क पर समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति जताई। इसके साथ ही हवाई संपर्क को और बेहतर बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। भारत और अजरबैजान के संबंधों में पिछले वर्ष तनाव बढ़ा था। मई 2025 में भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के दौरान पाकिस्तान के प्रति अजरबैजान के रुख को लेकर भारत में नाराजगी देखी गई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर सवाल उठने लगे थे। अब उच्चस्तरीय बैठकों के जरिए दोनों पक्ष संवाद और व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। जयशंकर की यह यात्रा लगभग आठ वर्षों बाद किसी भारतीय विदेश मंत्री की अजरबैजान की द्विपक्षीय यात्रा के रूप में भी उल्लेखनीय है। राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ बातचीत में दोनों देशों के संबंधों के विभिन्न पहलुओं और भविष्य में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर विचार किया गया। जयशंकर ने भारत की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं भी पहुंचाईं। बैठकों में आर्थिक विषयों के अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। आतंकवाद, संघर्ष और अस्थिरता से उत्पन्न चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। जयशंकर ने भारत का पक्ष दोहराते हुए कहा कि विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। भारत ने अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच शांति प्रक्रिया का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी। दोनों देशों के बीच बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग और आपसी संवाद जारी रखने के महत्व पर भी जोर दिया गया। इस यात्रा का वास्तविक प्रभाव आने वाले महीनों में व्यापारिक गतिविधियों, निवेश, ऊर्जा परियोजनाओं और परिवहन संपर्क से जुड़े ठोस कदमों के रूप में सामने आ सकता है। दोनों देशों के बीच नियमित कूटनीतिक बातचीत और कारोबारी प्रतिनिधिमंडलों का आदान-प्रदान संबंधों को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। निष्कर्ष: एस. जयशंकर की अजरबैजान यात्रा भारत की उस कूटनीतिक पहल का हिस्सा है, जिसके तहत पुराने मतभेदों के बावजूद संवाद के रास्ते खुले रखकर आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। व्यापार, ऊर्जा और परिवहन संपर्क को लेकर बनी सहमति दोनों देशों के संबंधों में सुधार का आधार बन सकती है। हालांकि, इस पहल की सफलता आगे होने वाले ठोस समझौतों और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।व्यापार और निवेश बढ़ाने पर सहमति
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर जोर
परिवहन संपर्क मजबूत करने की योजना
पुराने मतभेदों के बीच संबंध सुधारने की कोशिश
क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा
आगे क्या होगा?
एस. जयशंकर की अजरबैजान यात्रा से भारत के रिश्तों में सुधार की पहल, व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर जोर



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