नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान Form-7 के कथित सामूहिक इस्तेमाल का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अदालत ने 30 अक्टूबर को चुनाव आयोग को शिकायतों में उठाए गए तथ्यों की जांच करने, अनियमितता मिलने पर जरूरी सुधारात्मक कार्रवाई करने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे उन शिकायतों और मामलों का विवरण लिखित रूप में चुनाव आयोग के सामने रखें, जिनका समाधान अब तक नहीं हुआ है। आयोग को इन तथ्यों की पड़ताल कर उचित कदम उठाने होंगे। एक विधानसभा क्षेत्र में 32 आवेदन दाखिल करने का आरोप सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया कि उत्तर प्रदेश के एक विधानसभा क्षेत्र में एक विशेष समुदाय के मतदाताओं के नाम हटाने के उद्देश्य से 32 Form-7 आवेदन जमा किए गए थे। इनमें से दो आवेदनों पर बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के हस्ताक्षर होने का भी दावा किया गया। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग की ओर से दाखिल जवाब में कथित विसंगतियों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए, ताकि किसी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से नहीं हटे। चुनाव आयोग ने क्या कहा? चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने अदालत को बताया कि बड़ी संख्या में Form-7 आवेदन जमा किए जाने की जानकारी मिली थी। अधिकारियों ने इनकी जांच और दोबारा सत्यापन किया, जिसके बाद उन्हें गलत पाया गया। आयोग के अनुसार, इन आवेदनों के आधार पर किसी मतदाता का नाम नहीं हटाया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आयोग को शिकायतों में बताए गए तथ्यों की स्वतंत्र रूप से जांच करने और आवश्यक सुधार करने को कहा। साथ ही, की गई कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया। क्या होता है Form-7? Form-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज किसी व्यक्ति के नाम को हटाने के लिए आपत्ति या आवेदन देने में किया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य नियमों के तहत अपात्र या गलत प्रविष्टियों को सूची से हटाना है। हालांकि, किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले निर्धारित प्रक्रिया और संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देना जरूरी होता है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश मतदाता सूची की शुद्धता और नागरिकों के मतदान अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अब चुनाव आयोग की जांच और उसकी अनुपालन रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी। स्रोत: 30 अक्टूबर 2026 की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई से संबंधित मीडिया रिपोर्टें।
यूपी में SIR के दौरान Form-7 के कथित दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को जांच के निर्देश






