BREAKING NEWS

logo

Advertisement
Advertisement

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव का रास्ता साफ, 15 मई 2027 तक तैयार होगा संविधान; 18 दिन बाद छात्रों ने खत्म की भूख हड़ताल


नई दिल्ली। दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में करीब दो दशक से बंद पड़े छात्रसंघ चुनावों की बहाली को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी देने और उसे लागू करने के लिए 15 मई 2027 तक की समयसीमा निर्धारित कर दी है। प्रशासन के इस फैसले के बाद परिसर में पिछले 18 दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन और भूख हड़ताल समाप्त हो गई है।

छात्र लंबे समय से विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्रसंघ बहाल करने की मांग कर रहे थे। इस मांग को लेकर कई छात्रों ने अनिश्चितकालीन धरना दिया था और कुछ छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे थे। आंदोलन के दौरान छात्रों ने प्रशासन से चुनाव कराने की स्पष्ट तारीख और पूरी प्रक्रिया के लिए निश्चित समयसीमा घोषित करने की मांग की थी।

15 मई 2027 तक लागू होगा छात्रसंघ का संविधान

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से 29 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) के संविधान को 15 मई 2027 तक स्वीकृत कर लागू करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

संविधान को मंजूरी मिलने के बाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी करेगा। चुनाव लिंगदोह समिति की सिफारिशों और निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप कराए जाएंगे।

प्रशासन के कार्यक्रम के मुताबिक, अगले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के छह सप्ताह के भीतर चुनाव कराने की योजना है। नया शैक्षणिक सत्र लगभग 16 जुलाई 2027 से शुरू होने की संभावना है। ऐसे में छात्रसंघ चुनाव अगस्त 2027 के आसपास आयोजित किए जा सकते हैं।

18 दिनों की भूख हड़ताल के बाद आंदोलन समाप्त

छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में 18 दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी था। आंदोलनकारी छात्रों का कहना था कि केवल चुनाव कराने का आश्वासन पर्याप्त नहीं है, बल्कि संविधान तैयार करने और चुनाव कराने की पूरी प्रक्रिया के लिए निश्चित तारीख घोषित की जानी चाहिए।

इससे पहले 26 अक्टूबर को प्रशासन की ओर से एक आदेश जारी किया गया था, जिसमें संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने की बात कही गई थी। हालांकि, संविधान कब तक तैयार होगा, इसकी स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई थी।

इस वजह से प्रदर्शनकारी छात्रों ने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और अपना आंदोलन जारी रखा। इसके बाद 29 अक्टूबर को छात्र प्रतिनिधियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बातचीत हुई। कई दौर की चर्चा के बाद प्रशासन ने नई समयसीमा घोषित की।

नई घोषणा के बाद भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। आंदोलन में शामिल छात्रों ने इसे लंबे संघर्ष के बाद मिली महत्वपूर्ण सफलता बताया।

आंदोलन में शामिल छात्रों पर कार्रवाई वापस लेने का फैसला

छात्रसंघ बहाली के साथ-साथ विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंदोलन के दौरान छात्रों के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेने का भी निर्णय लिया है।

प्रशासन के आदेश के मुताबिक, प्रदर्शन में भागीदारी के कारण जारी किए गए कारण बताओ नोटिस, अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन, निष्कासन और परिसर में प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध वापस लिए जाएंगे।

यह फैसला आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में शामिल था। इससे उन छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई की थी।

2006 से नहीं हुए थे छात्रसंघ चुनाव

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनावों का इतिहास काफी पुराना है, लेकिन वर्ष 2006 में विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ को भंग कर दिया था। इसके बाद से यहां नियमित रूप से निर्वाचित छात्रसंघ का गठन नहीं हुआ।

पिछले करीब 20 वर्षों से छात्र विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक तरीके से प्रतिनिधि चुनने की व्यवस्था बहाल करने की मांग उठाते रहे हैं। छात्रों का मानना है कि निर्वाचित छात्रसंघ होने से उनकी समस्याओं, शैक्षणिक मांगों और अधिकारों को प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा।

छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

छात्रसंघ किसी भी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों और प्रशासन के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम होता है। इसके जरिए छात्र अपनी शैक्षणिक समस्याओं, परीक्षा व्यवस्था, छात्रावास, फीस, कैंपस सुविधाओं और अन्य मुद्दों को संगठित तरीके से उठा सकते हैं।

जामिया में छात्रसंघ की बहाली से विद्यार्थियों को अपनी पसंद के प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलने का रास्ता खुला है। हालांकि, वास्तविक चुनाव होने के लिए अभी संविधान की मंजूरी, चुनाव अधिसूचना और अन्य निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।

कुल मिलाकर, जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन का नया फैसला विश्वविद्यालय के छात्र राजनीति के इतिहास में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। करीब 20 वर्षों के अंतराल के बाद छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने से विद्यार्थियों में उत्साह है। अब सभी की नजरें 15 मई 2027 की समयसीमा और उसके बाद होने वाली चुनावी तैयारियों पर टिकी हैं।