नई दिल्ली/कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे संगठनात्मक विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि दोनों पक्ष अपनी दलीलें और जरूरी दस्तावेज तय समय में दाखिल करें और इसके बाद आयोग विवाद पर तीन महीने के भीतर अंतिम निर्णय ले। इस मामले में एक ओर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट है, जबकि दूसरी ओर प्रतिद्वंद्वी गुट ने पार्टी के नाम और पुराने चुनाव चिन्ह पर अपना दावा पेश किया है। विवाद के चलते चुनाव आयोग ने फिलहाल मूल नाम और ‘फूल और घास’ वाले पारंपरिक चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को चुनाव आयोग के समक्ष अपनी याचिकाएं, जवाब, हलफनामे और अन्य संबंधित दस्तावेज दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद चुनाव आयोग को मामले की सुनवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तीन महीने के भीतर फैसला करने को कहा गया है। इस तरह अदालत ने मामले के निपटारे के लिए एक स्पष्ट समयसीमा तय कर दी है। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि राजनीतिक दलों के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़े विवादों में बड़ी संख्या में दस्तावेज, हलफनामे और समर्थकों से जुड़े रिकॉर्ड सामने आते हैं। ऐसे मामलों में आयोग को जांच और सुनवाई के लिए अधिक समय की आवश्यकता पड़ सकती है। आयोग की ओर से छह महीने तक का अतिरिक्त समय मांगे जाने की बात सामने आई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसके बजाय तीन महीने की समयसीमा तय की। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि कोई असाधारण परिस्थिति सामने आती है तो आयोग दोबारा अदालत का रुख कर सकता है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक तब पहुंचा जब ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी, जिसमें TMC के मूल नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी। ममता पक्ष का कहना है कि पार्टी के नाम और पारंपरिक चिन्ह को इस तरह रोकना संगठन की राजनीतिक पहचान से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। दूसरी ओर, प्रतिद्वंद्वी पक्ष ने भी पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण और पहचान पर अपना दावा रखा है। इन दावों का अंतिम निर्धारण अभी चुनाव आयोग की प्रक्रिया में होना है। चुनाव आयोग के अंतरिम इंतजाम के तहत दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए गए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिन्ह आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम प्रकृति की है और इससे मूल TMC नाम तथा पुराने चुनाव चिन्ह पर अंतिम अधिकार तय नहीं होता। TMC का पारंपरिक चुनाव चिन्ह फूल और घास वाला प्रतीक रहा है। दोनों पक्ष इस राजनीतिक पहचान से जुड़े अधिकार को लेकर चुनाव आयोग के सामने अपना दावा पेश कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि इस विवाद का अंतिम निर्धारण संबंधित चुनावी कानून और Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के तहत किया जाना है। इसलिए फिलहाल अंतरिम व्यवस्था लागू है और अंतिम फैसला आने तक मूल नाम और चिन्ह का इस्तेमाल दोनों पक्ष नहीं कर सकते। मामले का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव प्रस्तावित हैं। दोनों गुटों की ओर से इन चुनावों के लिए उम्मीदवार उतारे गए हैं। चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था इन्हीं परिस्थितियों में लागू की गई है, जबकि मूल पार्टी नाम और चिन्ह पर अंतिम फैसला अभी बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले हुई सुनवाई में भी चुनाव आयोग से पूछा था कि वह इस विवाद पर अंतिम निर्णय लेने में कितना समय ले सकता है। अदालत ने संकेत दिया था कि मामला अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रहना चाहिए। 28 सितंबर की सुनवाई में अदालत ने अब प्रक्रिया के लिए ठोस समयसीमा तय कर दी है। इससे विवाद के अगले चरण की दिशा स्पष्ट हो गई है। अब दोनों गुटों को चार सप्ताह के भीतर चुनाव आयोग के सामने अपनी दलीलें, जवाब और संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद आयोग मामले की सुनवाई करेगा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार तीन महीने के भीतर अपना फैसला देगा। अंतिम निर्णय में यह तय किया जाएगा कि पार्टी के नाम, संगठनात्मक पहचान और मूल चुनाव चिन्ह पर किस पक्ष का दावा स्वीकार किया जाता है। फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। TMC के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अब प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित कर दी है। दोनों गुटों को चार सप्ताह में अपनी दलीलें पूरी करनी होंगी और उसके बाद चुनाव आयोग को तीन महीने में मामले पर फैसला करना होगा। इस निर्णय का महत्व आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों के साथ-साथ पार्टी की संगठनात्मक पहचान के लिए भी है। हालांकि, किस गुट को मूल TMC नाम और ‘फूल-घास’ चिन्ह मिलेगा, इसका फैसला अभी चुनाव आयोग को करना है। कॉपीराइट जागरूकता: यह स्क्रिप्ट स्वतंत्र शब्दावली, नए वाक्य-विन्यास और पुनर्गठित समाचार संरचना में तैयार की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के तथ्यों को हूबहू दोहराने के बजाय उन्हें स्वतंत्र हिंदी समाचार शैली में विस्तार दिया गया है।चार सप्ताह में पूरी करनी होगी दलीलें
EC ने मांगा था ज्यादा समय
ममता बनर्जी ने EC के अंतरिम आदेश को चुनौती दी
दोनों गुटों को दिए गए अलग नाम और चिन्ह
पुराने ‘फूल और घास’ चिन्ह पर क्यों है विवाद?
पश्चिम बंगाल के उपचुनावों के बीच बढ़ी अहमियत
सुप्रीम कोर्ट ने देरी को लेकर क्या कहा?
अब आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
निष्कर्ष
TMC के नाम और चुनाव चिन्ह विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, EC को तीन महीने में फैसला करने की समयसीमा


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