ॐ श्री सद्गुरवे नमः रांची: रांची जिला संतमत सत्संग समिति के तत्वावधान में महर्षि मेंहीं आश्रम, चुटिया में पांच दिवसीय ध्यान-साधना शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर के दौरान विभिन्न संतमत साधकों और वक्ताओं द्वारा योग, ध्यान, ज्ञान तथा ईश्वर भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पूज्यपाद डॉ. स्वामी निर्मलानंद जी महाराज ने कहा कि योग का अर्थ शरीर और जीव के साथ-साथ जीव और परमात्मा के मिलन से है। उन्होंने कहा कि योग एक आंतरिक क्रिया है, जिसके लिए किसी बाहरी वेशभूषा की आवश्यकता नहीं होती। योग से तन और मन दोनों निरोग रहते हैं। स्वामी श्यामानंद जी महाराज ने कहा कि ज्ञान कई प्रकार का होता है, जिसमें श्रवण, मनन, निदिध्यासन और अनुभव प्रमुख हैं। योग की युक्ति को जानकर उसका अभ्यास करने से प्रभु की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि योग का संस्कार कभी समाप्त नहीं होता और नियमित योगाभ्यास से मनुष्य अपने शरीर को स्वस्थ बनाए रख सकता है। युवा संन्यासी स्वामी प्रणवानंद जी महाराज ने कहा कि संतमत ज्ञान योगयुक्त ईश्वर भक्ति का प्रचार करता है। साधकों को पंचशील का पालन करते हुए गुरु के आदेश और परिवेश में रहकर ईश्वर भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए तथा आत्मकल्याण के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। आश्रम के अध्यक्ष श्री राजकुमार दास जी ने भगवान महावीर की वाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान और ध्यान एक-दूसरे के पूरक हैं। कार्यक्रम का संचालन स्वामी बालकृष्ण जी महाराज ने किया। शिविर के माध्यम से दूर-दराज से आने वाले साधकों को आध्यात्मिक साधना से जोड़ने और मानव जीवन को सफल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। समिति ने रांची जिले के सभी संतमत सत्संग समिति के सदस्यों एवं पदाधिकारियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर सत्संग का लाभ उठाने और पुण्य के भागी बनने का आग्रह किया है।
रांची में पांच दिवसीय ध्यान-साधना शिविर का आयोजन, योग और आध्यात्मिक साधना पर दिया गया जोर






