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संतमत ध्यान-साधना शिविर में भक्ति को मुक्ति की सीढ़ी बताया, गुरु की महिमा पर हुआ प्रवचन


रांची: रांची जिला संतमत सत्संग समिति के तत्वावधान में महर्षि मेंहीं आश्रम, चुटिया में आयोजित नौ दिवसीय ध्यान-साधना शिविर के दौरान रामचरितमानस में वर्णित नवधा भक्ति पर विस्तार से चर्चा की गई। सत्संग कार्यक्रम में संतमत के राष्ट्रीय प्रवचनकर्ता पूज्य डॉ. स्वामी निर्मलानंद जी महाराज ने कहा कि ईश्वर की भक्ति मुक्ति की सीढ़ी है।

उन्होंने रामचरितमानस में माता शबरी को दिए गए भगवान श्रीराम के उपदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि संतों का संग और सत्संग भक्ति का पहला सोपान है। इसके बाद गुरु की सेवा, अहंकार रहित रहकर गुरु के निर्देशों का पालन और गुरु के प्रति श्रद्धा भक्ति के महत्वपूर्ण चरण हैं। उन्होंने कहा कि गुरु के सानिध्य में रहकर उनके आदेशों का पालन करना और गुरु प्रदत्त मंत्र का जप करना साधक को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ाता है।

स्वामी निर्मलानंद जी महाराज ने बताया कि भक्ति के विभिन्न स्वरूपों में श्रवण, कीर्तन, स्मरण और अन्य साधनाएं शामिल हैं। इनका नियमित अभ्यास मनुष्य को आध्यात्मिक शांति की ओर ले जाता है। संतमत सत्संग में इन क्रियाओं को अपनाने की प्रेरणा दी जाती है, ताकि साधक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ सके।

इस अवसर पर पूज्य स्वामी श्यामानंद जी महाराज ने भक्ति में गुरु की महत्ता पर संक्षिप्त रूप से प्रकाश डाला। वहीं, पूज्य स्वामी बालकृष्ण जी महाराज ने समझाया कि मनुष्य को भक्ति क्यों करनी चाहिए, किसकी भक्ति करनी चाहिए और उसे किस प्रकार अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

शिविर में दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और धर्मप्रेमी शामिल हो रहे हैं। रांची जिला संतमत सत्संग समिति के सदस्य एवं पदाधिकारी कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटे हैं। समिति ने शहर के धर्मप्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर सत्संग का लाभ उठाने और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने की अपील की है।