BREAKING NEWS

logo

Advertisement
Advertisement

इंडोनेशिया में जंगल की आग को लेकर राष्ट्रपति प्रबोवो के खिलाफ सामूहिक मुकदमा


जकार्ता, 19 सितंबर 2026। इंडोनेशिया के पश्चिम कालीमंतन में जंगल और जमीन में लगने वाली आग को नियंत्रित करने के सरकारी प्रयासों पर सवाल उठाते हुए आदिवासी संगठनों और नागरिक समूहों ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो तथा अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सामूहिक मुकदमा दायर किया है। मामला पश्चिम कालीमंतन की पोंटियानक अदालत में दर्ज किया गया है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि क्षेत्र में हर साल दोहराने वाली जंगल और भूमि की आग को रोकने तथा उससे निपटने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। उनके वकील ग्लोरियो सानेन के अनुसार, मुकदमे के पीछे स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही चिंताएं हैं। हालांकि, सरकार की ओर से इस आरोप पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

7 अक्टूबर को पहली सुनवाई

अदालत में दर्ज दस्तावेजों के मुताबिक मामले की पहली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। मुकदमा दायर करने वालों में इंडोनेशिया के आदिवासी समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन, पश्चिम कालीमंतन का कैथोलिक युवा संगठन, पर्कumpulan लामन पुनयुंग इंडोनेशिया और एक स्थानीय नागरिक शामिल हैं।

आग और धुएं से प्रभावित क्षेत्र

पश्चिम कालीमंतन इस समय गंभीर जंगल की आग और धुएं की समस्या से जूझ रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, लंबे समय से जारी शुष्क मौसम और मजबूत होते एल नीनो प्रभाव ने आग की स्थिति को और कठिन बनाया है। पोंटियानक में धुएं के कारण दृश्यता एक किलोमीटर से भी कम होने की स्थिति सामने आई थी, जिससे विमान सेवाएं और दैनिक गतिविधियां प्रभावित हुईं।

सरकार ने भी चेतावनी दी है कि इस वर्ष आग की स्थिति नवंबर तक जारी रह सकती है। Reuters के अनुसार, इंडोनेशिया इस समय करीब 11 वर्षों की सबसे गंभीर जंगल की आग की स्थिति का सामना कर रहा है।

पहले भी अदालत पहुंचा था जंगल की आग का मामला

इंडोनेशिया में जंगल की आग को लेकर सरकार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2016 में सात नागरिकों ने तत्कालीन राष्ट्रपति जोको विडोडो, उनके मंत्रियों और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ 2015 की भीषण आग से निपटने के तरीके को लेकर मुकदमा दायर किया था।

उस मामले में निचली अदालत से नागरिकों के पक्ष में फैसला आया था, लेकिन बाद में सरकार की न्यायिक समीक्षा याचिका पर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को पलट दिया था।

अब अदालत में तय होगी जिम्मेदारी

ताजा मुकदमे में याचिकाकर्ता सरकारी तंत्र की आग रोकने और उससे निपटने की व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से फिलहाल तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई है। अब अदालत की कार्यवाही में यह स्पष्ट होना बाकी है कि याचिकाकर्ताओं के आरोपों पर कानूनी रूप से क्या विचार किया जाता है और संबंधित सरकारी एजेंसियां अपना पक्ष किस तरह रखती हैं।