थिम्फू/नई दिल्ली। हिमालयी देश भूटान में 29 अक्टूबर की रात एक ग्लेशियर झील से अचानक भारी मात्रा में पानी निकलने के कारण भीषण फ्लैश फ्लड आ गई। शिंताफू (Shintaphu) ग्लेशियर झील में हुए इस जल विस्फोट से गासा जिले में स्थित प्रसिद्ध प्राकृतिक गर्म पानी के झरने गासा त्शाचू (Gasa Tshachu) का बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ आने से पहले प्रभावित क्षेत्र को खाली करा लिया गया था, जिसके कारण अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। इस प्राकृतिक आपदा ने स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अचानक आए तेज बहाव के कारण सड़कें, पुल और पर्यटक सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। अधिकारियों की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, 29 अक्टूबर की शाम भूटान के गासा जिले में स्थित शिंताफू झील से अचानक पानी का तेज बहाव शुरू हुआ। पहाड़ी इलाकों से गुजरता हुआ बाढ़ का पानी मो छू (Mo Chhu) नदी के जलप्रवाह में शामिल हो गया। रात के समय पानी का स्तर तेजी से बढ़ा और नदी के आसपास स्थित पर्यटन क्षेत्र इसकी चपेट में आ गया। तेज बहाव अपने साथ मिट्टी, पत्थर और मलबा लेकर आया, जिससे आसपास के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। भूटान के सरकारी प्रसारक BBS के अनुसार, अंधेरा और पानी का तेज बहाव होने के कारण शुरुआत में नुकसान की पूरी जानकारी जुटाना मुश्किल था। गासा त्शाचू भूटान के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां पहाड़ों के बीच प्राकृतिक रूप से गर्म पानी के झरने मौजूद हैं, जहां स्थानीय लोगों के अलावा बड़ी संख्या में पर्यटक भी पहुंचते हैं। अचानक आई बाढ़ ने इस पर्यटन परिसर की सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। कुछ रिपोर्टों में पूरे हॉट स्प्रिंग परिसर के बह जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा दो अस्थायी बेली पुलों के भी तेज बहाव में बह जाने की आशंका है। यह इलाका पहले भी प्राकृतिक आपदा का सामना कर चुका है। अगस्त 2021 में मो छू नदी का रास्ता बदलने के कारण यहां भीषण बाढ़ आई थी और पर्यटन क्षेत्र की कई संरचनाएं क्षतिग्रस्त हुई थीं। बाढ़ का असर केवल पर्यटन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। पुनाखा-गासा हाईवे के एक हिस्से को भी भारी नुकसान पहुंचा है। सड़क का हिस्सा बह जाने के कारण इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। लाया गांव की ओर जाने वाला रास्ता भी प्रभावित हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने यात्रियों और पर्यटकों को अगली सूचना तक गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। सड़क की मरम्मत और नुकसान का आकलन किए जाने के बाद ही यातायात बहाल करने पर निर्णय लिया जाएगा। भूटान में ग्लेशियर झील से निकले पानी का प्रभाव भारत तक पहुंचने की आशंका है। मो छू नदी आगे चलकर पुनात्सांगछू और फिर भारत में संकोश नदी के रूप में बहती है। इसी वजह से नदी के निचले इलाकों में जलस्तर अचानक बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और असम के धुबरी जिलों के लिए विशेष बाढ़ चेतावनी जारी की है। अधिकारियों को नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने और आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी सहित सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। पश्चिम बंगाल में संकोश नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में 10 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। असम के धुबरी जिले में भी प्रशासन संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारी कर रहा है। ग्लेशियर झील से अचानक पानी निकलने की घटना को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है। हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों के पिघलने से बड़ी मात्रा में पानी जमा होकर झीलों का निर्माण होता है। इन झीलों के किनारे अक्सर बर्फ, मिट्टी और पत्थरों से बनी प्राकृतिक दीवारें होती हैं। जब किसी कारण से यह प्राकृतिक अवरोध कमजोर होकर टूट जाता है, तो झील का पानी अचानक नीचे की ओर तेजी से बहने लगता है। इस तरह की बाढ़ सामान्य नदी बाढ़ से ज्यादा खतरनाक हो सकती है, क्योंकि पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा, चट्टानें और मिट्टी भी बहती हैं। इससे कुछ ही समय में सड़कें, पुल, मकान और दूसरी संरचनाएं नष्ट हो सकती हैं। भूटान की शिंताफू झील को पहले से ही संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियर झीलों की सूची में शामिल किया गया था। भूटान और भारत के प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लोगों से कहा गया है कि वे नदी के पास जाने, पुलों पर रुकने और बाढ़ प्रभावित रास्तों से गुजरने से बचें। विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों की नियमित निगरानी और समय पर चेतावनी प्रणाली विकसित करना बेहद जरूरी है। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। कुल मिलाकर, भूटान में शिंताफू ग्लेशियर झील से अचानक पानी निकलने की घटना ने हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर से जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को फिर उजागर किया है। गासा त्शाचू का पर्यटन क्षेत्र और सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। हालांकि भूटान में फिलहाल किसी जनहानि की खबर नहीं है, लेकिन भारत के पश्चिम बंगाल और असम में संकोश नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर प्रशासन अलर्ट पर है।रात में अचानक आया बाढ़ का पानी
गासा त्शाचू का प्रसिद्ध गर्म पानी का झरना प्रभावित
पुनाखा-गासा हाईवे का हिस्सा बहा, यातायात बंद
भारत के पश्चिम बंगाल और असम में भी बाढ़ का खतरा
क्या होती है ग्लेशियर झील फटने से आने वाली बाढ़?
प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
भूटान में ग्लेशियर झील फटने से भीषण बाढ़, गासा त्शाचू का मशहूर गर्म पानी का पर्यटन स्थल तबाह; भारत के बंगाल और असम में अलर्ट






