पोलैंड में राष्ट्रपति करोल नवरॉकी और प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के नेतृत्व वाली सरकार के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। देश की न्यायिक व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद अब गंभीर टकराव का रूप लेते जा रहे हैं। विवाद उस समय और गहरा गया, जब शीर्ष अदालत के प्रमुख को निलंबित किए जाने का मामला सामने आया। इस घटनाक्रम ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और सरकारी संस्थाओं की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। राष्ट्रपति और सरकार के बीच अधिकारों की सीमा तथा न्यायिक नियुक्तियों से जुड़े मुद्दे पहले से ही विवाद का विषय रहे हैं। ताजा घटनाक्रम ने इस राजनीतिक खींचतान को और बढ़ा दिया है। दोनों पक्षों के बीच मतभेद का असर देश की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि यदि विवाद का समाधान संवैधानिक दायरे में नहीं निकलता है तो पोलैंड में संस्थागत टकराव और गहरा सकता है। फिलहाल देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच बातचीत से कोई सहमति बनती है या न्यायपालिका को लेकर जारी विवाद आने वाले दिनों में बड़े संवैधानिक संकट का रूप लेता है।
पोलैंड में सत्ता संघर्ष तेज, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री खेमे के बीच न्यायपालिका को लेकर विवाद गहराया






