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AI और डेटा सेंटरों की बिजली जरूरत पूरी करने के लिए अमेरिका की बड़ी तैयारी, तीन परमाणु संयंत्र फिर होंगे शुरू


वॉशिंगटन, 16 अक्टूबर 2026। अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बड़े डेटा सेंटरों और औद्योगिक गतिविधियों के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए अमेरिकी सरकार बंद पड़े तीन परमाणु बिजली संयंत्रों को दोबारा चालू करने की दिशा में काम कर रही है। इन संयंत्रों के फिर से संचालन में आने पर कुल लगभग 2.25 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता बिजली ग्रिड में जुड़ने का लक्ष्य है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने इन परियोजनाओं के लिए कुल 4.4 अरब डॉलर तक के ऋण की व्यवस्था की है। इस पहल का उद्देश्य बिजली आपूर्ति को मजबूत करना और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए विश्वसनीय स्रोत तैयार करना है। 

तीन राज्यों में परमाणु संयंत्रों को दोबारा चालू करने की योजना

अमेरिका की इस योजना में मिशिगन का पलिसेड्स परमाणु बिजली संयंत्र, पेंसिल्वेनिया स्थित क्रेन क्लीन एनर्जी सेंटर और आयोवा का डुआने अर्नोल्ड एनर्जी सेंटर शामिल हैं। ये संयंत्र अलग-अलग समय पर आर्थिक और परिचालन संबंधी कारणों से बंद कर दिए गए थे। अब बिजली की बढ़ती मांग और परमाणु ऊर्जा की स्थिर आपूर्ति क्षमता को देखते हुए इन्हें फिर से उपयोग में लाने की कोशिश की जा रही है।

इन तीनों संयंत्रों की संयुक्त क्षमता लगभग 2,250 मेगावाट है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के अनुसार, इनके दोबारा शुरू होने से करीब 20 लाख घरों और व्यवसायों के बराबर बिजली जरूरतों को पूरा करने की क्षमता मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक उत्पादन संयंत्रों के संचालन, नियामकीय मंजूरी और तकनीकी तैयारियों पर निर्भर करेगा। 

AI और डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली खपत बड़ी वजह

AI तकनीक के विस्तार ने अमेरिका में ऊर्जा की मांग को नई दिशा दी है। आधुनिक डेटा सेंटरों में बड़ी संख्या में सर्वर, कंप्यूटिंग सिस्टम और शीतलन उपकरण लगातार काम करते हैं। इन प्रणालियों को चौबीसों घंटे बिजली की जरूरत होती है। AI मॉडल के प्रशिक्षण और संचालन में बढ़ती कंप्यूटिंग क्षमता की आवश्यकता के कारण बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है।

इसके अतिरिक्त, सेमीकंडक्टर निर्माण, औद्योगिक उत्पादन और डिजिटल सेवाओं का विस्तार भी ऊर्जा की मांग में वृद्धि कर रहा है। ऐसे में अमेरिकी सरकार और बिजली कंपनियां मौजूदा बिजली संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ बंद पड़े परमाणु संयंत्रों को फिर से चालू करने पर ध्यान दे रही हैं।

परमाणु ऊर्जा का एक प्रमुख लाभ यह है कि संयंत्र मौसम की स्थिति पर सीधे निर्भर हुए बिना लगातार बिजली उपलब्ध करा सकते हैं। इससे उन्हें बिजली ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने में उपयोगी माना जाता है।

4.4 अरब डॉलर तक की वित्तीय सहायता

अमेरिकी ऊर्जा विभाग इन परियोजनाओं के लिए ऋण उपलब्ध करा रहा है, ताकि संयंत्रों की मरम्मत, उपकरणों की जांच, सुरक्षा प्रणालियों के आधुनिकीकरण और अन्य जरूरी कार्यों को पूरा किया जा सके। इस तरह की परियोजनाओं में परमाणु ईंधन की व्यवस्था, प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति और नियामकीय मंजूरी हासिल करना भी महत्वपूर्ण होता है।

आयोवा के डुआने अर्नोल्ड संयंत्र के लिए सितंबर 2026 में 1.9 अरब डॉलर तक का ऋण अंतिम रूप से स्वीकृत किया गया। पेंसिल्वेनिया के क्रेन क्लीन एनर्जी सेंटर को फिर से चालू करने के लिए 1 अरब डॉलर का ऋण दिया गया है। मिशिगन के पलिसेड्स संयंत्र को दोबारा शुरू करने के लिए पहले से उपलब्ध वित्तीय सहायता भी जारी है। इन परियोजनाओं के लिए बताई गई कुल ऋण व्यवस्था लगभग 4.4 अरब डॉलर तक पहुंचती है। 

सरकार का तर्क है कि पहले से मौजूद परमाणु ढांचे का इस्तेमाल करना नया बड़ा संयंत्र बनाने की तुलना में कम समय ले सकता है। हालांकि, बंद पड़े संयंत्रों को दोबारा चालू करने में भी पर्याप्त निवेश, तकनीकी जांच और सुरक्षा संबंधी मंजूरियों की जरूरत होती है।

माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियों की भी दिलचस्पी

बड़े तकनीकी कारोबारों को भविष्य में बड़ी मात्रा में स्थिर और कम-कार्बन बिजली की जरूरत है। इसी वजह से कुछ परमाणु संयंत्रों के पुनः संचालन की योजनाओं में तकनीकी कंपनियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

पेंसिल्वेनिया के क्रेन क्लीन एनर्जी सेंटर के साथ माइक्रोसॉफ्ट का बिजली खरीद समझौता है। वहीं, आयोवा के डुआने अर्नोल्ड संयंत्र को फिर से चालू करने की योजना में नेक्स्टएरा एनर्जी और गूगल के बीच दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौता शामिल है। ऐसे समझौतों से परियोजना संचालकों को भविष्य में बिजली बेचने और निवेश की लागत की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

इन समझौतों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डेटा सेंटरों के विस्तार के साथ बिजली की उपलब्धता भी बढ़े। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि परमाणु संयंत्रों से मिलने वाली अतिरिक्त बिजली का लाभ हर उपभोक्ता को समान रूप से या तुरंत मिले। बिजली की कीमतों पर असर स्थानीय बाजार, ग्रिड की स्थिति और परियोजनाओं की लागत पर निर्भर करेगा।

सुरक्षा और पर्यावरण को लेकर उठ रहे सवाल

परमाणु संयंत्रों को फिर से चालू करने की योजना के समर्थन में कहा जा रहा है कि इससे स्थिर बिजली आपूर्ति मजबूत हो सकती है और कार्बन उत्सर्जन कम रखने में मदद मिल सकती है। लेकिन विशेषज्ञों ने सुरक्षा जांच और पुराने उपकरणों की स्थिति पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई है।

अमेरिका के कई परमाणु संयंत्र दशकों पुराने हैं। इसलिए लंबे समय तक बंद रहने के बाद उन्हें दोबारा शुरू करने से पहले उपकरणों, शीतलन प्रणालियों, सुरक्षा प्रबंधों और आपातकालीन व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच जरूरी है। जलवायु परिवर्तन के कारण भीषण मौसम की घटनाओं का जोखिम बढ़ने से संयंत्रों की सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

परमाणु सुरक्षा से जुड़े कुछ विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि सरकारी धन का इस्तेमाल करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों। दूसरी ओर, इस योजना के समर्थकों का कहना है कि बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए मौजूदा परमाणु ढांचे का उपयोग व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।

संयंत्र कब तक शुरू हो सकते हैं?

तीनों परियोजनाओं की समयसीमा अलग-अलग है। पलिसेड्स संयंत्र को मार्च 2027 तक दोबारा बिजली उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य दिया गया है, हालांकि तकनीकी जांच और सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाएं इसकी समयसीमा को प्रभावित कर सकती हैं। क्रेन क्लीन एनर्जी सेंटर के लिए भी 2027 में संचालन बहाल करने की योजना है। आयोवा का डुआने अर्नोल्ड संयंत्र 2029 की शुरुआत में दोबारा चालू होने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। इन सभी योजनाओं के लिए संबंधित नियामक मंजूरियां आवश्यक हैं। 

अमेरिका की ऊर्जा नीति में परमाणु शक्ति का बढ़ता महत्व

अमेरिका की यह पहल दिखाती है कि AI और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ ऊर्जा सुरक्षा भी राष्ट्रीय रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। सरकार केवल नई बिजली उत्पादन परियोजनाओं पर निर्भर रहने के बजाय मौजूदा संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने और बंद इकाइयों को फिर से उपयोग में लाने के विकल्पों पर काम कर रही है।

यदि ये परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर शुरू हो जाती हैं, तो बिजली ग्रिड को अतिरिक्त उत्पादन क्षमता मिलेगी और डेटा सेंटरों सहित औद्योगिक क्षेत्रों की मांग पूरी करने में मदद मिल सकती है। लेकिन इन प्रयासों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वित्तीय लागत, सुरक्षा मानकों और तकनीकी चुनौतियों का समाधान कितनी प्रभावी ढंग से किया जाता है।

निष्कर्ष: अमेरिका में बंद पड़े तीन परमाणु संयंत्रों को दोबारा चालू करने की योजना बढ़ती बिजली मांग, खासकर AI और डेटा सेंटरों की जरूरतों, का जवाब देने की एक बड़ी कोशिश है। करीब 2.25 गीगावाट अतिरिक्त उत्पादन क्षमता और 4.4 अरब डॉलर तक की ऋण व्यवस्था इस योजना के पैमाने को दर्शाती है। फिर भी, सुरक्षित संचालन और नियामकीय मंजूरी के बिना इन संयंत्रों से बिजली उत्पादन शुरू नहीं हो सकता।

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