पटना: बिहार की राजधानी पटना में नल-जल योजना से जुड़े पंप ऑपरेटरों और रखरखाव कर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे कर्मियों ने मानदेय, सेवा शर्तों और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार से तत्काल पहल की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। रिपोर्टों के मुताबिक, 6 अक्टूबर को बड़ी संख्या में नल-जल अनुरक्षक पटना के गांधी मैदान में जुटे। प्रदर्शनकारियों की योजना मुख्यमंत्री आवास की ओर पैदल मार्च करने की थी। इसके बाद वे जेपी गोलंबर की तरफ बढ़े, जहां पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे जाने से रोक दिया। पुलिस की रोक के बाद कई प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और वहीं अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया। बाद में प्रदर्शनकारियों को वापस गर्दनीबाग धरना स्थल की ओर लौटना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारी बाद में शांतिपूर्वक वहां से चले गए और किसी बड़े कानून-व्यवस्था संकट की स्थिति नहीं बनी। नल-जल अनुरक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी सेवा और आर्थिक समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं। संघ की ओर से सामने रखी गई प्रमुख मांगों में मानदेय बढ़ाने, सेवा से जुड़ी नई नियमावली लागू करने और कर्मियों को काम के दौरान अधिक स्पष्ट अधिकार एवं सुरक्षा देने जैसे मुद्दे शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उन्हें मौजूदा व्यवस्था में मिलने वाले कथित कम मानदेय की जगह 18 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाए। इसके अलावा पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा, अवकाश और त्योहारों पर बोनस जैसी मांगें भी आंदोलन का हिस्सा हैं। कर्मियों का एक प्रमुख मुद्दा कामकाज की मौजूदा व्यवस्था से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उन्हें ठेकेदार या स्थानीय स्तर की व्यवस्था के बजाय अधिक स्पष्ट और सीधे प्रशासनिक ढांचे के तहत काम करने की सुविधा मिले। संघ का कहना है कि नल-जल व्यवस्था को सुचारू रखने में पंप ऑपरेटर और रखरखाव कर्मचारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनके रोजगार और भुगतान से जुड़े मामलों में स्पष्ट नीति जरूरी है। नल-जल अनुरक्षक संघ के पदाधिकारियों ने दावा किया है कि उनका आंदोलन कई सप्ताह से जारी है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष गणेश चौधरी के मुताबिक, गर्दनीबाग में लंबे समय से धरना चल रहा है और सरकार से ठोस निर्णय की मांग की जा रही है। कुछ रिपोर्टों में संघ की ओर से लंबे समय से भूख हड़ताल किए जाने का भी दावा किया गया है। हालांकि, ये दावे प्रदर्शनकारी संगठन के पक्ष से हैं और इन्हें उसी रूप में देखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री आवास की ओर प्रस्तावित मार्च को देखते हुए पटना पुलिस ने जेपी गोलंबर, डाकबंगला चौराहा और इनकम टैक्स गोलंबर सहित कई प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई। पुलिस अधिकारियों और विभिन्न थानों की टीमों को तैनात किया गया था। प्रदर्शन के कारण राजधानी के कुछ प्रमुख मार्गों पर यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पर भी दबाव देखने को मिला। नल-जल योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी परिवारों तक नियमित पेयजल पहुंचाना है। ऐसे में योजना के संचालन और रखरखाव से जुड़े कर्मचारियों की सेवा व्यवस्था भी महत्वपूर्ण हो जाती है। दिलचस्प बात यह है कि 28 सितंबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की समीक्षा के दौरान हर घर नल का जल योजना में 100 प्रतिशत जलापूर्ति सुनिश्चित करने, नियमित रखरखाव और शिकायतों के समय पर समाधान पर जोर दिया था। ऐसे में अब कर्मचारियों की मांगों और योजना के बेहतर संचालन के बीच संतुलन बनाना सरकार के सामने अहम चुनौती है। प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं होता है तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। फिलहाल सरकार और प्रदर्शनकारी कर्मियों के बीच इस मुद्दे पर आगे क्या बातचीत होती है, इस पर नजर बनी हुई है। निष्कर्ष: पटना में नल-जल कर्मियों का प्रदर्शन केवल मानदेय का मुद्दा नहीं, बल्कि उनकी सेवा शर्तों, रोजगार की सुरक्षा और योजना के रखरखाव से जुड़े व्यापक सवालों को सामने ला रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या निर्णय लेती है और आंदोलन को आगे बढ़ने से रोकने के लिए क्या पहल होती है।गांधी मैदान से शुरू हुआ विरोध
छह सूत्रीय मांगों पर जोर
ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी
लंबे आंदोलन का दावा
पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा
सरकार के सामने बड़ा सवाल
आंदोलन आगे बढ़ने की चेतावनी
पटना में नल-जल कर्मियों का प्रदर्शन, मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा






