किताबों से निकले व्यावसायिक विचार, विद्यार्थियों ने दिखाई उद्यमिता की नई सोच
जमशेदपुर, 26 सितंबर 2026:
किताबें केवल पढ़ने और कहानियाँ जानने का माध्यम नहीं, बल्कि नई सोच विकसित करने, समस्याओं को समझने और उनके समाधान तलाशने का सशक्त माध्यम भी हैं। इसी विचार को रचनात्मक रूप देने के उद्देश्य से डी.बी.एम.एस. कॉलेज ऑफ एजुकेशन की लाइब्रेरी द्वारा शनिवार को बहुउद्देशीय सभागार में ‘बैटल ऑफ द बुक्स’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम लाइब्रेरियन काजल कुमारी महतो एवं एंजल मुंडा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस वर्ष प्रतियोगिता की थीम “किताब से शार्क टैंक यानी किसी भी एक किताब से प्रेरित व्यावसायिक विचार प्रस्तुत करें” रही।
कार्यक्रम का मंच संचालन अनमोल ने किया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पुस्तकों से प्राप्त विचारों को केवल कहानी या जानकारी के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं, नए समाधान और संभावित व्यावसायिक अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया। कॉलेज की मेंटर डॉ. जूही समर्पिता ने जज के रूप में विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का आकलन किया।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने यह समझने का प्रयास किया कि किसी पुस्तक से प्राप्त सीख को केवल पढ़कर छोड़ देने के बजाय उसे अपने आसपास की समस्याओं को पहचानने और उनके समाधान के लिए नए विचार विकसित करने में कैसे उपयोग किया जा सकता है। प्रस्तुतियों में वित्तीय जागरूकता, नए और मौलिक समाधान, छोटे स्तर पर किसी विचार को आजमाना, लोगों की आवश्यकताओं को समझना, कौशल को रोजगार से जोड़ना तथा आत्मनिर्भरता जैसे विषय प्रमुख रूप से सामने आए।
इस गतिविधि ने विद्यार्थियों को व्यवसाय को केवल लाभ कमाने के माध्यम के रूप में देखने के बजाय लोगों की जरूरतों और वास्तविक समस्याओं को समझकर उनके समाधान के रूप में सोचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सीखा कि किसी भी नए विचार की शुरुआत एक समस्या को पहचानने से हो सकती है और उसे छोटे स्तर पर आजमाकर, लोगों की प्रतिक्रिया समझकर तथा लगातार सुधार करते हुए आगे बढ़ाया जा सकता है।
प्रतियोगिता से विद्यार्थियों में यह आत्मविश्वास भी विकसित हुआ कि उनके अपने विचार भविष्य में किसी उपयोगी पहल या व्यवसाय का आधार बन सकते हैं। पुस्तकों से मिली सीख को व्यावहारिक परिस्थितियों से जोड़ते हुए उन्होंने रचनात्मक सोच, निर्णय लेने की क्षमता, समस्या-समाधान, प्रस्तुतीकरण कौशल और उद्यमशील दृष्टिकोण को समझने का अवसर प्राप्त किया।
विद्यार्थियों की रचनात्मकता, प्रस्तुतीकरण, आत्मविश्वास, पुस्तकों से जुड़ाव और साहित्य के प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए। ‘द अल्टीमेट शार्क अवॉर्ड’ सर्वश्रेष्ठ समग्र प्रस्तुति के लिए करीना कुमारी, ‘द पेज टर्नर अवॉर्ड’ पुस्तक से प्रभावी जुड़ाव के लिए अरुंधति गुप्ता को, ‘द पिच परफेक्ट अवॉर्ड’ सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतीकरण एवं आत्मविश्वास के लिए रीमा रॉय को, ‘द जजेज़ चॉइस अवॉर्ड’ जज की पसंद के लिए सुप्रीति दास को तथा ‘द बुकवर्म-प्रेन्योर अवॉर्ड’ साहित्य के सर्वश्रेष्ठ उपयोग के लिए अंजलि मंडल को प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में बी. एड. की छात्रा अनमोल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
‘बैटल ऑफ द बुक्स’ का उद्देश्य विद्यार्थियों में केवल पठन की आदत विकसित करना नहीं, बल्कि पढ़ने से सोचने और सोचने से कुछ नया करने की प्रेरणा देना रहा। डी बीएमएस कॉलेज की मेंटर और एडवाइजर डॉक्टर जूही समर्पिता ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि किताबों से मिलने वाला ज्ञान तभी अधिक सार्थक बनता है, जब वह हमारी सोच को बदलने, नए प्रश्न उठाने और वास्तविक जीवन के लिए उपयोगी समाधान खोजने की प्रेरणा दे। उन्होंने कहा कि जब लेखक लिखता है तो वह स्वांत सुखाए लिखता है, वह नहीं समझ पाता कि उसकी लेखनी में इतनी शक्ति है।
आरके नारायण, सुधा मूर्ति।
रोबिन शर्मा।
शिव खेड़ा , रॉबर्ट कियोस्की पीटर थील, नेपोलियन हिल, जैसे अनेक
लेखकों से प्रेरित होकर अपना निजी व्यवसाय भी शुरू किया जा सकता है बैटल ऑफ़ बुक्स में छात्रों ने अपनी दमदार प्रस्तुति से रखी. रोआल्ड डाल की पुस्तक चॉकलेट फैक्ट्री से प्रेरित होकर एक छात्रा अंजलि मंडल ने अपना चॉकलेट बनाने का व्यवसाय शुरू करने की पूरी योजना बना कर प्रस्तुत किया।
पूरे कार्यक्रम का संचालन अनमोल ने किया.
कार्यक्रम को सफल बनाने में कॉलेज की सचिव श्रीप्रिया धर्मराजन, सह सचिव सुधा दिलीप, प्राचार्या डॉ. मोनिका उप्पल उप प्राचार्या डॉ. पामिला घोष दत्ता एवं शिक्षक गण के साथ ही सहायक सहकर्मी ने अपने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।




