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RBI के रेपो रेट बढ़ाने के बाद शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, बैंकिंग शेयरों ने संभाला मोर्चा


मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान दबाव देखने को मिला। हालांकि, शुरुआती गिरावट के बाद बाजार ने कुछ हद तक रिकवरी की और बैंकिंग व वित्तीय शेयरों में खरीदारी लौटने से प्रमुख सूचकांकों की गिरावट सीमित हुई। दोपहर के आसपास निफ्टी 50 करीब 22,677 अंक और सेंसेक्स लगभग 72,888 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहे थे।

रेपो रेट बढ़ने का बाजार पर तत्काल असर

RBI की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने का फैसला किया। यह बढ़ोतरी महंगाई, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों से जुड़े दबावों के बीच की गई है। साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। बाजार में इस बदलाव को आगे भी ब्याज दरों को लेकर सतर्क रुख के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

RBI के फैसले के बाद शुरुआती कारोबार में निफ्टी और सेंसेक्स करीब 0.7 प्रतिशत तक नीचे चले गए थे। निवेशकों की नजर खास तौर पर इस बात पर थी कि ऊंची ब्याज दरों का कंपनियों की मांग, कर्ज की लागत और भविष्य की कमाई पर कितना असर पड़ सकता है।

बैंकिंग शेयरों में दिखी मजबूती

बाजार में सबसे अहम बदलाव बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में देखने को मिला। शुरुआती दबाव के बाद कई बैंकिंग शेयरों में सुधार आया और बैंकिंग सूचकांकों ने अपनी गिरावट को काफी हद तक कम किया। रिपोर्टों के अनुसार निजी और सरकारी क्षेत्र के कुछ बैंक बढ़त में कारोबार करते नजर आए।

इसका एक कारण यह भी माना जा रहा है कि रेपो-लिंक्ड कर्ज की ब्याज दरें अपेक्षाकृत तेजी से बदल सकती हैं। वहीं, RBI ने इस बार अतिरिक्त लिक्विडिटी को बड़े स्तर पर खींचने वाला कोई नया कदम नहीं उठाया, जिससे बैंकों की फंडिंग लागत को लेकर तत्काल चिंता कुछ कम हुई।

ऑटो, FMCG और रियल एस्टेट पर दबाव

दूसरी ओर, ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील माने जाने वाले कुछ सेक्टरों में कमजोरी बनी रही। ऑटोमोबाइल, FMCG और रियल एस्टेट शेयरों पर दबाव देखा गया। ऊंची ब्याज दरों से कर्ज महंगा होने की संभावना इन क्षेत्रों के लिए मांग और निवेश के नजरिए से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

महंगा कच्चा तेल भी बाजार की चिंता

शेयर बाजार की चाल केवल RBI के फैसले से प्रभावित नहीं हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। महंगा तेल भारत के लिए आयात लागत बढ़ा सकता है, जिसका असर महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।

आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?

अब निवेशकों की नजर RBI के अगले कदम, महंगाई के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक ब्याज दरों और कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन पर रहेगी। मौद्रिक नीति के रुख में बदलाव के बाद बाजार में आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि, अलग-अलग सेक्टर और कंपनियां ब्याज दरों में बदलाव को अलग तरीके से प्रभावित कर सकती हैं।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, RBI के 0.25 प्रतिशत रेपो रेट बढ़ाने के बाद भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती घबराहट जरूर दिखी, लेकिन बाद में बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में सुधार से प्रमुख सूचकांकों ने कुछ नुकसान की भरपाई की। दोपहर के कारोबार में निफ्टी करीब 22,677 और सेंसेक्स करीब 72,888 के स्तर पर था। आने वाले सत्रों में निवेशकों का फोकस महंगाई, तेल की कीमतों और RBI की आगे की नीति पर बना रहेगा।