BREAKING NEWS

logo

Advertisement
Advertisement

बोकारो स्टील प्लांट के सभी 11 गेट खुले, हाईकोर्ट के निर्देश पर सामान्य हुआ आवागमन; विस्थापितों का आंदोलन जारी


बोकारो, 19 अक्टूबर 2026: झारखंड के बोकारो स्टील प्लांट (BSL) में विस्थापितों की नियोजन संबंधी मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन उस समय महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया, जब झारखंड हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद संयंत्र के सभी 11 प्रवेश द्वार खोल दिए गए। गेटों पर प्रदर्शनकारियों की नाकेबंदी के कारण कर्मचारियों और अधिकारियों की आवाजाही बाधित हो रही थी। रविवार को प्रशासन की कार्रवाई के बाद प्लांट में आने-जाने का रास्ता फिर से खुल गया।

हाईकोर्ट ने लिया मामले का संज्ञान

संयंत्र के सभी प्रवेश द्वारों पर जाम लगने और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होने के बाद बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने रविवार को विशेष सुनवाई की। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि प्लांट के गेटों पर आवागमन सुनिश्चित किया जाए और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

सुनवाई के दौरान बोकारो के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए। प्रशासन की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रदर्शनकारियों को समझाकर सभी 11 गेट खुलवा दिए गए हैं। इसके बाद कर्मचारियों की आवाजाही बहाल होने की जानकारी भी दी गई।

अदालत ने राज्य सरकार से मामले की परिस्थितियों और प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों के संबंध में विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत करने को कहा है। मामले में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित बताई गई है।

नियोजन की मांग को लेकर आठ दिनों से चल रहा था आंदोलन

बोकारो स्टील प्लांट से प्रभावित विस्थापितों और विस्थापित अप्रेंटिस संघ के सदस्य रोजगार तथा नियोजन से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। उनकी मांगों पर सहमति नहीं बनने के बाद प्रदर्शन तेज हो गया। शनिवार को आंदोलनकारियों ने प्लांट के मुख्य गेट सहित अन्य प्रवेश द्वारों पर भी नाकेबंदी कर दी।

इससे कर्मचारियों, अधिकारियों और संविदा श्रमिकों के आने-जाने में परेशानी हुई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 3,000 कर्मचारियों के संयंत्र परिसर में फंसे होने की जानकारी सामने आई। प्लांट में शिफ्ट बदलने, कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार इस्पात की ढुलाई पर भी असर पड़ने की खबर थी।

उत्पादन प्रभावित होने से बढ़ी चिंता

बोकारो स्टील प्लांट एक प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठान है, जहां उत्पादन प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। ऐसे संयंत्र में कर्मचारियों की आवाजाही और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति बाधित होने से परिचालन संबंधी गंभीर चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

गेटों की नाकेबंदी के दौरान कुछ प्रमुख उत्पादन इकाइयों के कामकाज पर असर पड़ने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई। इसी वजह से प्रबंधन ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की, ताकि संयंत्र की गतिविधियां और कर्मचारियों की सुरक्षा प्रभावित न हों।

प्रशासन ने लागू की निषेधाज्ञा

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने मुख्य गेट के आसपास 200 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की। इसका उद्देश्य प्रतिबंधित क्षेत्र में भीड़ जुटने और ऐसी गतिविधियों को रोकना था, जिनसे प्लांट का संचालन या सार्वजनिक आवागमन प्रभावित हो सकता था।

गेटों से जाम हटने के बाद कर्मचारियों और अधिकारियों की आवाजाही सामान्य होने लगी। हालांकि, विस्थापितों का आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, आंदोलनकारी टू टैंक गार्डन के पास अपनी मांगों को लेकर अनशन जारी रखे हुए थे।

अब नियोजन की मांग पर समाधान का इंतजार

फिलहाल, प्लांट के सभी 11 गेट खुलने से तत्काल परिचालन संबंधी बाधा दूर हुई है। लेकिन विस्थापितों की रोजगार और नियोजन संबंधी मांगों का स्थायी समाधान निकलना अभी बाकी है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि प्लांट प्रबंधन, जिला प्रशासन और आंदोलनकारी संगठनों के बीच बातचीत से कोई सहमति बनती है या नहीं।

निष्कर्ष: बोकारो स्टील प्लांट के सभी 11 गेट खुलने से कर्मचारियों की आवाजाही बहाल हुई और औद्योगिक गतिविधियों को सामान्य करने का रास्ता साफ हुआ। हाईकोर्ट ने प्रशासन को व्यवस्था बनाए रखने और अपना पक्ष शपथपत्र के माध्यम से रखने का निर्देश दिया है। वहीं, विस्थापितों की नियोजन संबंधी मांगों पर अंतिम निर्णय और आंदोलन का समाधान अभी प्रतीक्षित है।