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समेकित कृषि प्रणाली से बढ़ेगी किसानों की आमदनी, 100 किसानों को दिया गया प्रशिक्षण


उदय किशोर सिंह,

जामताड़ा। चंद्रदीपा पंचायत अंतर्गत गोवाकोला गांव में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से समेकित कृषि प्रणाली को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में पंचायत क्षेत्र के करीब 100 महिला एवं पुरुष किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को पारंपरिक खेती के साथ कृषि से जुड़े अन्य कार्यों को जोड़कर कम लागत में अधिक आमदनी प्राप्त करने के तरीके बताए गए।कार्यक्रम में किसानों को बताया गया कि केवल कृषि पर निर्भर रहने के बजाय किसान पशुपालन, गाय पालन, बकरी पालन, सूकर पालन, मुर्गी पालन, बतख पालन और मत्स्य पालन जैसे विभिन्न अवयवों को खेती के साथ जोड़कर अपनी आमदनी के स्रोत बढ़ा सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान इन सभी गतिविधियों की उपयोगिता, उनके आपसी संबंध तथा किसानों को होने वाले आर्थिक लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।प्रशिक्षकों ने बताया कि समेकित कृषि प्रणाली में कृषि के साथ अलग-अलग कृषि आधारित गतिविधियों को इस तरह जोड़ा जाता है कि एक अवयव से निकलने वाला उत्पाद या अपशिष्ट दूसरे अवयव के लिए इनपुट के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। इससे बाहरी संसाधनों पर निर्भरता कम होती है और उत्पादन लागत में कमी आती है। किसानों को उदाहरण के माध्यम से समझाया गया कि पशुपालन से प्राप्त गोबर का इस्तेमाल खेतों में जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है। इसी तरह कृषि से प्राप्त अवशेषों का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में किया जा सकता है। तालाब आधारित मत्स्य पालन के साथ बतख पालन जैसी गतिविधियों को जोड़कर भी अतिरिक्त आमदनी प्राप्त की जा सकती है। इस प्रकार एक ही कृषि इकाई के विभिन्न हिस्से एक-दूसरे के पूरक बनकर किसानों को अधिक लाभ पहुंचा सकते हैं।प्रशिक्षण के दौरान किसानों को यह भी बताया गया कि समेकित कृषि प्रणाली का मुख्य उद्देश्य कम लागत में अधिक उत्पादन और अधिक मुनाफा प्राप्त करना है। इससे किसानों को खेती के साथ वर्षभर आय के अलग-अलग स्रोत उपलब्ध हो सकते हैं तथा किसी एक फसल या गतिविधि पर निर्भरता कम होती है। कार्यक्रम में शामिल महिला और पुरुष किसानों ने समेकित कृषि प्रणाली को उपयोगी बताते हुए कहा कि यदि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को खेती के साथ पशुपालन एवं अन्य गतिविधियों को जोड़कर अपनी आय बढ़ाने और कृषि लागत कम करने के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी मिली।