जिला भू अर्जन पदाधिकारी कार्यालय रांची में शुरू से हावी है मुआवजा दिलानेवाला सिंडिकेट
डीएलएओ को भी 10 से 15 फीसदी मिलता है घूस का हिस्सा
विशेष संवाददाता
रांची : राजधानी का जिला भू अर्जन कार्यालय अब विवादों में फंसता जा रहा है। जिस तरह अनपढ़ और ठेपा मार रैयतों के मुआवजे की राशि हड़पने के लिए भू अर्जन कार्यालय के ही कर्मी सिंडिकेट की तरह साजिश रच रहे हैं। उससे अब मूल और वास्तविक रैयतों को मुआवजडे की राशि नहीं दी जा रही है। वर्षों से वास्तविक रैयत कोर्ट कचहरी तथा डीसी कार्यालय का ही चक्कर काटते रहते हैं, पर फरजी लोगों की सेटिंग-गेटिंग से तुरंत पैसा ट्रांसफर हो जाता है। सूत्र बताते हैं कि जिला भू अर्जन पदाधिकारी को भी इस राशि का बड़ा हिस्सा पहुंच रहा है। औसतन राष्ट्रीय उच्च पथ, ट्रांसपोर्ट नगर, राज्य उच्च पथ, एयरपोर्ट विस्तारीकरण तथा अन्य परियोजनाओं के लिए अधिगृहित की जानेवाली जमीन का मुआवजा दिया जाता है।
सुकुरहुट्टू के ट्रांसपोर्ट नगर मामला कोई नया नहीं
रांची के सुकुरहुट्टू में भूमि अधिग्रहण के मुआवजा मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। यह कोई पहला मामला नहीं है। 2009 से जमीन अधिग्रहण से संबंधित मुआवजे की गड़बड़ी चली आ रही है। सुकुरहुट्टू में हुए जमीन अधिग्रहण मामले अब तक जिला भू अर्जन कार्यालय के तीन कर्मियों ने 4.51 करोड़ के मुआवजा भुगतान में 2.25 करोड़ रुपये हड़प लिये। इसमें भू अर्जन कार्यालय के अमित गुप्ता पर एक करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप लगा है। सूत्रों का कहना है कि जिला भू अर्जन कार्यालय के नये सिंडिकेट की ओर से कुल मुआवजे की राशि में से 30 से 50 फीसदी तक की राशि बतौर घूस ली जा रही है। इसके लिए फरजी रैयत और दलाल भू अर्जन कार्यालय की तरफ से ही खड़े किये जा रहे हैं। नया सिंडिकेट मुआवजा राशि का भुगतान करने के नाम पर जिला भू अर्जन पदाधिकारी कृष्ण कुमार राजहंस को भी उपकृत कर रहा है। बताया जाता है कि जिला भू अर्जन पदाधिकारी को 10 से 15 फीसदी की राशि बड़ी डील में पहुंचायी जा रही है। सुकुरहुट्टू के ट्रांसपोर्ट नगर के जमीन अधिग्रहण में जिस तरह एक पाहन परिवार के 73 डिसमिल जमीन के जमीन लिये जाने का मामला अब गरमाता जा रहा है।
हाईकोर्ट ने 2010 में दिया था वास्तविक रैयतों को ही मुआवजा देने का निर्देश
झारखंड हाईकोर्ट ने 2010 में एक रिट याचिका में वास्तविक रैयतों को ही मुआवजा देने का निर्देश दिया था। उस समय बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए 350 एकड़ जमीन लिये जाने के मामले में कई फरजी रैयतों और बिहार से आये लोगों ने हेथू, हराटांड़, हुंडरू, लटमा, न्यू लटमा सहित 14 से अधिक गांवों के रैयतों की जमीन खरीद कर नये रैयतदार बन गये। हाईकोर्ट में इस बात को लेकर याचिका दायर की गयी थी कि कैसे तत्कालीन कारा महानिरीक्षक शैलेंद्र भूषण द्वारा गलत तरीके से खरीदी गयी जमीन और लिये गये 75 लाख के मुआवजे की बातें कही गयी थी। इसी पर हाईकोर्ट का निर्देश आया था।






