पर्यावरणविद डॉ. कौशल ने पृथ्वी दिवस पर वृक्षों को बांधी ‘वन राखी’ दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
प्रकृति से केवल लेना नहीं देना भी सीखें: पर्यावरणविद डॉक्टर कौशल
पलामू : छतरपुर अनुमंडल के डाली बाजार पंचायत स्थित कौशल नगर में विश्व पृथ्वी दिवस के 56वें वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरणविद डॉ. कौशल किशोर जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। हाल ही में 25 दिनों के उपचार के बाद स्वस्थ हुए डॉ. कौशल ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत डाली के मोहनलाल खुर्जा पार्वती देवी पार्क में कन्या पूजन के साथ पौधारोपण से हुई। इस अवसर पर डॉ. कौशल ने कहा कि “प्रकृति से केवल लेना ही नहीं, बल्कि उसे लौटाना भी सीखना चाहिए।” उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को हर व्यक्ति का धर्म बताते हुए इसे दैनिक जीवन में अपनाने की अपील की।
डॉ. कौशल ने वर्ष 1967 में लगाए गए अपने वृक्षों पर ‘रक्षाबंधन’ कर ‘वन राखी’ आंदोलन का संदेश दिया। कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने वृक्षों को राखी बांधकर प्रकृति के प्रति संरक्षण और संवेदनशीलता का प्रतीक प्रस्तुत किया। इस दौरान करीब 200 ग्रामीणों को अंग वस्त्र देकर उन्हें सम्मानित भी किया ।
पर्यावरण धर्म ज्ञान मंदिर में आयोजित जागरूकता सत्र में डॉ. कौशल ने बढ़ते प्रदूषण, भीषण गर्मी, जल संकट और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रत्येक व्यक्ति को ‘पर्यावरण धर्म’ के 11 मूल मंत्रों को अपने जीवन में शामिल करना होगा। “केवल सरकार के भरोसे समाधान संभव नहीं है। समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा।
उन्होंने परमाणु ऊर्जा और अत्यधिक आधुनिक सुविधाओं के दुष्प्रभावों पर चिंता जताते हुए सौर और पवन ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने कहा कि वैश्विक तनाव और युद्ध की स्थिति भी पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।
कार्यक्रम में मौजूद स्थानीय लोगों ने डॉ. कौशल के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि पलामू की धरती धन्य है। जहां ऐसे पर्यावरण प्रेमी ने जन्म लिया। उनके द्वारा स्थापित पर्यावरण धर्म ज्ञान मंदिर और मोहनलाल खुर्जा पार्वती देवी पार्क क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग निशुल्क भ्रमण करने आते हैं। मौके पर पूर्व मुखिया अफजाल अंसारी, जुबेर अंसारी, गुलाम गौस, शिवनाथ राम, बाबूराम, सरताज अहमद, लक्ष्मण राम, गुलदन राम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं उपस्थित थीं।





