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जुगसलाई में वोट बिखराव के चलते हुई नौशीन की जीत


जुगसलाई नगर परिषद अध्यक्ष पद का चुनाव इस बार स्थानीय मुद्दों से अधिक राजनीतिक रणनीति और वोटों के ध्रुवीकरण का अखाड़ा बन गया। झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्ला खान की पत्नी नौशीन खान ने 11,563 मत प्राप्त कर भाजपा समर्थित प्रत्याशी रिंकू सिंह को 720 वोटों से पराजित किया। रिंकू सिंह को 10,843 वोट मिले, जबकि तीसरे मोर्चे की प्रत्याशी डॉली मल्लिक को 895 मत हासिल हुए।

चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि मुकाबला सीधा नहीं था, बल्कि परदे के पीछे सियासी गणित पूरी तरह सक्रिय था। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अंतिम समय में डॉली मल्लिक को समर्थन देकर चुनावी समीकरण को त्रिकोणीय बना दिया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम भाजपा समर्थित वोट बैंक में सेंध लगाने की सोची-समझी रणनीति थी। आंकड़ों पर नजर डालें तो रिंकू सिंह और डॉली मल्लिक के वोट जोड़ने पर कुल 11,738 मत होते, जो विजेता से 175 अधिक हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि विपक्षी मतों का विभाजन निर्णायक रहा।

चुनाव में धार्मिक और सामुदायिक ध्रुवीकरण भी साफ दिखाई दिया। मुस्लिम बहुल इलाकों में नौशीन खान को मजबूत समर्थन मिला, जिससे उनका आधार स्थिर रहा। वहीं दूसरी ओर गैर-मुस्लिम वोट एकजुट नहीं हो सके। भाजपा समर्थित प्रत्याशी को अपेक्षित कंसोलिडेशन नहीं मिला, जिसका सीधा असर नतीजों पर पड़ा।

सिख समुदाय की भूमिका भी इस चुनाव में अहम रही। सिख समाज के प्रभावशाली नेता सरदार शैलेंद्र सिंह की पत्नी बलबीर कौर ने नामांकन दाखिल किया था, लेकिन भाजपा नेताओं के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने रिंकू सिंह के समर्थन में चुनाव मैदान छोड़ दिया। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर यह रणनीति पूरी तरह सफल नहीं रही। बलबीर कौर को 548 वोट मिले, जो दर्शाता है कि उनका समर्थन पूरी तरह ट्रांसफर नहीं हुआ। यदि डॉली मल्लिक और बलबीर कौर के मत रिंकू सिंह के खाते में जुड़ते, तो उनका आंकड़ा 12,286 तक पहुंच सकता था—जो विजेता से 723 वोट अधिक होता।