रांची, 20 अक्टूबर 2026। झारखंड सरकार ने राज्य के निवासियों को राहत देने के लिए आपदा से होने वाली मौतों पर अनुग्रह अनुदान के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब झारखंड के किसी निवासी की अधिसूचित आपदा के कारण अपने गृह जिले से बाहर, राज्य के दूसरे जिले, देश के किसी अन्य राज्य या विदेश में मृत्यु होने पर भी उनके पात्र आश्रितों को आर्थिक सहायता मिल सकेगी। इस बदलाव का उद्देश्य उन परिवारों को राहत देना है, जिन्हें घटना दूसरे स्थान पर होने के कारण सहायता प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती थी। 19 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद इस संबंध में संशोधित व्यवस्था जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। नई व्यवस्था में मृतक के मूल गृह जिले के प्रशासन को अनुग्रह अनुदान की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी दी गई है। घटना जिस स्थान पर हुई है, वहां के सक्षम अधिकारियों के माध्यम से मामले का सत्यापन कराया जाएगा। इसके बाद मृत्यु प्रमाण पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्राथमिकी और जांच से जुड़े आवश्यक दस्तावेज जुटाए जाएंगे। संबंधित दस्तावेजों की जांच और पात्रता की पुष्टि होने के बाद मृतक के गृह जिले के उपायुक्त यानी डीसी के माध्यम से आश्रितों को निर्धारित सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इससे दूसरे राज्य या विदेश में किसी अधिसूचित आपदा का शिकार हुए झारखंड के निवासियों के परिवारों को भी राज्य की सहायता व्यवस्था के दायरे में आने का अवसर मिलेगा। अनुग्रह अनुदान की व्यवस्था अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं और निर्धारित स्थानीय आपदाओं के लिए लागू होती है। इनमें नियमों के अंतर्गत वज्रपात, अत्यधिक बारिश, सर्पदंश, खनन दुर्घटना, पानी में डूबने, भगदड़, गैस रिसाव, आंधी-तूफान, ग्रीष्म लहर और सड़क दुर्घटना जैसी घटनाएं शामिल हो सकती हैं। हालांकि, प्रत्येक घटना में सहायता की पात्रता संबंधित सरकारी अधिसूचना और लागू शर्तों के अनुसार तय होगी। सरकार ने अनुग्रह अनुदान के दोहरे भुगतान को रोकने के लिए भी प्रावधान रखा है। एक ही मृत्यु के मामले में दो अलग-अलग स्थानों से अनुग्रह राशि प्राप्त नहीं की जा सकेगी। इसके लिए मृतक के आश्रितों से शपथ पत्र लिया जा सकता है, जिसमें उन्हें यह घोषित करना होगा कि उन्होंने किसी अन्य कार्यालय या संस्था से इसी मद में अनुग्रह अनुदान प्राप्त नहीं किया है। यदि आवेदन में गलत जानकारी दी जाती है या दोहरी सहायता लेने का मामला सामने आता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए आवेदन करते समय सभी जानकारियां सही देना और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा। बीमा और अनुग्रह अनुदान के संबंध में भी पात्रता की शर्तें निर्धारित की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यदि मृतक के बीमा का प्रीमियम केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जमा किया जाता था, तो संबंधित प्रावधानों के तहत बीमा राशि और आपदा अनुग्रह अनुदान में से किसी एक का लाभ ही मिल सकता है। वहीं, यदि मृतक अपने बीमा का प्रीमियम स्वयं जमा करता था, तो उसके आश्रित अनुग्रह अनुदान के लिए पात्र हो सकते हैं। अंतिम निर्णय लागू सरकारी नियमों और मामले की जांच के आधार पर होगा। आपदा में मृत्यु होने की स्थिति में परिवार को संबंधित जिले के प्रशासन या उपायुक्त कार्यालय से संपर्क करना चाहिए। आवेदन के साथ मृत्यु प्रमाण पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्राथमिकी, घटना से संबंधित जांच रिपोर्ट और मांगे गए अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं। दूसरे राज्य या विदेश में हुई घटना के मामलों में वहां के सक्षम अधिकारियों से सत्यापन कराना भी आवश्यक हो सकता है। निष्कर्ष: झारखंड सरकार के इस फैसले से राज्य के उन परिवारों को राहत मिलने की संभावना है, जिनके परिजनों की अधिसूचित आपदा में गृह जिले से बाहर मृत्यु हो जाती है। अब सहायता का दावा केवल घटना के स्थान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्धारित शर्तों के अधीन मृतक के मूल गृह जिले के प्रशासन के माध्यम से भी प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। हालांकि, अनुग्रह अनुदान की सटीक राशि, दस्तावेजों और पात्रता की पुष्टि के लिए संबंधित सरकारी आदेश देखना जरूरी है। स्रोत: 19 अक्टूबर 2026 की प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के आधार पर स्वतंत्र शब्दों में तैयार समाचार।गृह जिले के उपायुक्त करेंगे भुगतान
किन घटनाओं में मिल सकती है सहायता?
दोहरी सहायता लेने पर रहेगी रोक
बीमा राशि को लेकर क्या है नियम?
प्रभावित परिवारों को क्या करना चाहिए?
झारखंड सरकार का बड़ा फैसला: दूसरे राज्य या विदेश में आपदा से मौत होने पर भी मिलेगा अनुग्रह अनुदान






