संजीव अंबष्ठा ने झारखंड में आदिवासी महिलाओं और बच्चों की तस्करी रोकने के लिए सरकार से की कार्रवाई की मांग
जी.पी. रामगढ़ के Sanjeev Ambastha ने झारखंड से आदिवासी महिलाओं और बच्चों की तस्करी रोकने हेतु सरकार से की तत्काल कार्रवाई की मांग
जी.पी. रामगढ़, झारखंड: जी.पी. रामगढ़ के निवासी संजीव Ambastha ने झारखंड से आदिवासी महिलाओं और बच्चों की बढ़ती तस्करी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भारत सरकार से तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
अनुमानों के अनुसार, झारखंड से हर वर्ष लगभग 1 लाख महिलाओं और बच्चों की तस्करी की जाती है, जिनमें से करीब 80% आदिवासी समुदाय से संबंधित हैं। इस समस्या से सर्वाधिक प्रभावित जिले हैं—सिमडेगा, गुमला, खूंटी, साहिबगंज, दुमका और रांची।
संजीव Ambastha ने बताया कि इस गंभीर समस्या के प्रमुख कारण गरीबी और बेरोजगारी, शिक्षा और जागरूकता की कमी, पलायन और विस्थापन, लैंगिक भेदभाव, कमजोर कानून-प्रवर्तन तथा शहरी क्षेत्रों में सस्ते श्रम की बढ़ती मांग हैं।
उन्होंने पीड़ितों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें बंधुआ एवं जबरन मजदूरी, यौन शोषण, शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न, शिक्षा और बचपन से वंचित होना शामिल है। यह स्थिति मानव गरिमा और मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
हालांकि, अनैतिक तस्करी निवारण अधिनियम, भारतीय दंड संहिता की धारा 370 और 370A, किशोर न्याय अधिनियम तथा पॉक्सो अधिनियम जैसे कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, साथ ही उज्जवला योजना और वन स्टॉप सेंटर (OSC) जैसी सरकारी पहलें भी हैं, फिर भी इनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है।
संजीव Ambastha ने सरकार से निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है:
संवेदनशील आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा दिया जाए
रोजगार के अवसर और कौशल विकास को प्रोत्साहित किया जाए
ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को मजबूत किया जाए
सामुदायिक निगरानी और स्थानीय सतर्कता तंत्र विकसित किए जाएं
तस्करी विरोधी कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए
पुलिस, न्यायपालिका और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए
तस्करी मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना की जाए
बचाव और पुनर्वास की प्रभावी व्यवस्था की जाए, जिसमें सुरक्षित आश्रय, परामर्श और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हों
शिक्षा और आजीविका प्रशिक्षण के माध्यम से दीर्घकालिक पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए
गैर-सरकारी संगठनों और नागरिक समाज की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाए
उन्होंने कहा कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए आर्थिक सशक्तिकरण, मजबूत शासन, सामाजिक जागरूकता और पीड़ित-केंद्रित पुनर्वास आवश्यक है।
संजीव Ambastha ने सरकार से अपील की है कि वह इस गंभीर मुद्दे पर शीघ्र और ठोस कदम उठाकर आदिवासी समुदायों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करे।





