काले शीशों पर सख्ती हो, पुलिस व्यवहार भी सुधरे: रूचिर कुमार तिवारी
पलामू: भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के जिला सचिव, अधिवक्ता सह डालटनगंज विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी रूचिर कुमार तिवारी ने मोटर वाहन नियमों के उल्लंघन और पुलिस व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक प्रेस बयान जारी कर कहा कि वाहनों में काले शीशे (ब्लैक फिल्म) एवं पर्दे लगाना पूरी तरह गैरकानूनी है और इस पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए।
तिवारी ने कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट 1988 एवं उसके संशोधन विधेयक 2019 के अनुसार केवल उच्च सुरक्षा श्रेणी (जेड एवं वाई+ श्रेणी) के अंतर्गत आने वाले विशिष्ट व्यक्तियों — जैसे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री एवं मंत्री — को ही विशेष परिस्थितियों में इस प्रकार की छूट प्राप्त है। आम नागरिकों को टिंटेड ग्लास या सनफिल्म के उपयोग में निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य है, जिसमें फ्रंट ग्लास के लिए 70% और साइड ग्लास के लिए 50% विजिबल लाइट ट्रांसमिशन (VLT) तय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में कई आपराधिक प्रवृत्ति के लोग, तथाकथित सफेदपोश अपराधी और यहां तक कि कुछ पुलिस पदाधिकारी भी अपने वाहनों में पूर्णतः काले शीशों का उपयोग कर रहे हैं, जो कानून का खुला उल्लंघन है। तिवारी ने कहा कि पूर्व के पलामू एसपी के कार्यकाल में इस नियम की अनदेखी की गई, जिससे ऐसे मामलों को बढ़ावा मिला।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी वाहन में पूरी तरह काले शीशे लगाना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन चिंताजनक है। तिवारी ने कहा कि काले शीशों के कारण कई बार आपराधिक घटनाओं, विशेषकर महिलाओं के साथ अपराध, को अंजाम देना आसान हो जाता है।
वर्तमान पुलिस अधीक्षक द्वारा काले शीशों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई निष्पक्ष रूप से सभी पर लागू होनी चाहिए, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई प्रभावशाली व्यक्ति।
इसके साथ ही उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की कि जिले के सभी थानों में आम लोगों के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि गरीब, मजदूर, दलित और आदिवासी वर्ग के लोग पुलिस के कठोर व्यवहार के कारण थाने जाने से डरते हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
अंत में तिवारी ने कहा कि पुलिस को अपनी कार्यशैली में सुधार लाकर “जनता के सेवक” के रूप में कार्य करना चाहिए, ताकि आम नागरिकों का कानून व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।





