नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026। जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। भारत सरकार ने इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की हालिया बैठक में जम्मू-कश्मीर को लेकर पारित प्रस्तावों और भारत के संदर्भों पर कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने इन टिप्पणियों को पक्षपातपूर्ण और तथ्यहीन बताते हुए कहा कि संगठन को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। यह विवाद इराक की राजधानी बगदाद में 17 और 18 अक्टूबर को आयोजित OIC के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद सामने आया। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने इस अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत के खिलाफ अपना पक्ष आगे बढ़ाने के लिए किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने 19 अक्टूबर को जारी प्रतिक्रिया में OIC की बैठक के दौरान भारत और जम्मू-कश्मीर से संबंधित प्रस्तावों में किए गए संदर्भों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया। मंत्रालय का कहना है कि इन टिप्पणियों में निष्पक्षता का अभाव है और वे राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हैं। भारत ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश के अभिन्न अंग हैं। सरकार के अनुसार, इन क्षेत्रों से जुड़े विषय भारत की संप्रभुता और आंतरिक प्रशासन से संबंधित हैं, इसलिए किसी बाहरी संगठन की ओर से इस मामले में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जा सकता। विदेश मंत्रालय ने OIC की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि संगठन को बार-बार ऐसे मुद्दों पर प्रस्ताव पारित करने के बजाय अपने सदस्य देशों के बीच सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए। भारत ने अपने बयान में पाकिस्तान पर OIC के मंच का इस्तेमाल अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए करने का आरोप लगाया। भारतीय पक्ष का कहना है कि जम्मू-कश्मीर को लेकर संगठन में बार-बार भारत विरोधी संदर्भ सामने आना चिंताजनक है। नई दिल्ली ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में नागरिक अधिकारों और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए। भारत का तर्क है कि पाकिस्तान को दूसरे देशों के मामलों पर टिप्पणी करने से पहले अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। ये भारत सरकार की ओर से लगाए गए आरोप और व्यक्त किया गया आधिकारिक पक्ष हैं। संबंधित पक्षों के दावों का स्वतंत्र मूल्यांकन अलग विषय है। विदेश मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाए जाने के बाद हुए विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। सरकार के अनुसार, बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों में सुधार से स्थानीय आबादी को लाभ मिला है। भारत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के विकास और प्रशासन से जुड़े निर्णय देश की संवैधानिक व्यवस्था के तहत लिए जाते हैं। सरकार का रुख है कि बाहरी राजनीतिक प्रस्तावों से भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। इस्लामिक सहयोग संगठन 57 सदस्य देशों वाला एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो मुस्लिम देशों के बीच सहयोग और साझा मुद्दों पर समन्वय के लिए काम करता है। जम्मू-कश्मीर का विषय इस संगठन के विभिन्न मंचों पर लंबे समय से उठता रहा है। भारत के लिए OIC की टिप्पणियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि जम्मू-कश्मीर का प्रश्न देश की संप्रभुता, सुरक्षा और पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों से जुड़ा हुआ है। भारत लगातार यह रुख अपनाता रहा है कि पाकिस्तान के साथ सभी लंबित मुद्दों पर बातचीत द्विपक्षीय आधार पर होनी चाहिए और आतंकवाद से जुड़े सवालों का समाधान भी आवश्यक है। OIC के प्रस्तावों को लेकर भारत की ताजा प्रतिक्रिया से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, सीमा पार आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे के खिलाफ समर्थन जुटाने के मुद्दे भारत-पाकिस्तान संबंधों में लंबे समय से तनाव के प्रमुख कारण रहे हैं। हालांकि, इस विवाद का वास्तविक प्रभाव आने वाले दिनों में दोनों देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों पर निर्भर करेगा। निष्कर्ष: OIC की बैठक में जम्मू-कश्मीर को लेकर सामने आए प्रस्तावों पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। नई दिल्ली ने संगठन के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए पाकिस्तान पर मंच के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच जारी कूटनीतिक मतभेदों को केंद्र में ला दिया है।भारत ने OIC के प्रस्तावों को किया खारिज
पाकिस्तान पर लगाए गंभीर आरोप
अनुच्छेद 370 का भी किया गया उल्लेख
OIC क्या है और भारत के लिए यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत-पाकिस्तान संबंधों पर क्या पड़ सकता है असर?
OIC की कश्मीर संबंधी टिप्पणियों पर भारत का कड़ा विरोध, पाकिस्तान पर संगठन के मंच के दुरुपयोग का आरोप






