प्रधानमंत्री मोदी ने श्लोक के माध्यम से ज्ञान और विवेक का दिया संदेश
नई
दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को एक
प्रेरणादायक संस्कृत श्लोक के माध्यम से जीवन की सीमित अवधि, ज्ञान की
विशालता और अनेक बाधाओं के बीच सार तत्व को ग्रहण करने की सीख दी। प्रधानमंत्री
मोदी ने एक्स पोस्ट में श्लोक साझा किया, "अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च
विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च। यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा
क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥" इस श्लोक का अर्थ है कि शास्त्र अनंत हैं, विद्याएं
बहुत हैं, लेकिन समय बहुत कम है और बाधाएं भी अनेक हैं।
इसलिए जो सारभूत
या सबसे महत्वपूर्ण और उपयोगी हो, उसी का सेवन करना चाहिए। ठीक वैसे ही
जैसे हंस पानी के बीच से केवल दूध निकाल लेता है और बाकी छोड़ देता है। प्रधानमंत्री
मोदी का यह संदेश न केवल छात्रों और युवाओं के लिए बल्कि समाज के हर वर्ग
के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है। यह श्लोक आधुनिक जीवन की आपाधापी में
सही निर्णय लेने, ज्ञान को उपयोगी दिशा देने और अनावश्यक भटकाव से बचने की
सीख देता है।






