नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026। सरकारी योजनाओं के जरिए आर्थिक सहायता दिलाने का झांसा देकर लोगों से पैसे ऐंठने वाले साइबर ठगों के खिलाफ भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने लोगों को सतर्क किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली इस एजेंसी की राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई (NCTAU) ने 19 अक्टूबर को जारी चेतावनी में बताया कि सोशल मीडिया पर फर्जी सरकारी योजनाओं और कैशबैक ऑफर के नाम पर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले सामने आ रहे हैं। इन फर्जी विज्ञापनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों जैसे सार्वजनिक व्यक्तियों के नाम, तस्वीरों और कथित वीडियो का इस्तेमाल किया जा रहा है। विज्ञापनों को इस तरह तैयार किया जाता है कि लोगों को लगे कि सरकार वास्तव में कोई नई योजना चला रही है और वे उसके तहत आर्थिक सहायता पाने के पात्र हैं। I4C के अनुसार, धोखाधड़ी के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे मेटा प्लेटफॉर्म पर भ्रामक विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे हैं। कुछ विज्ञापनों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो या बदले हुए दृश्य दिखाए जाते हैं, जिनमें सार्वजनिक हस्तियों को कथित तौर पर किसी सरकारी योजना का प्रचार करते हुए दिखाया जाता है। इन विज्ञापनों में लोगों को आर्थिक सहायता, सरकारी लाभ या विशेष कैशबैक मिलने का लालच दिया जाता है। इसके बाद उन्हें किसी फोन नंबर पर संपर्क करने, व्हाट्सऐप पर संदेश भेजने या संदिग्ध वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण करने के लिए कहा जाता है। ठग सरकारी अधिकारियों या योजना के प्रतिनिधियों के रूप में खुद को पेश कर सकते हैं। इस तरह लोगों का भरोसा जीतने के बाद उनसे पैसे या निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है। इस धोखाधड़ी का एक प्रमुख तरीका लोगों से सरकारी लाभ दिलाने के बदले पहले भुगतान करवाना है। पीड़ितों से रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग चार्ज, टैक्स, दस्तावेज सत्यापन शुल्क या अन्य प्रशासनिक खर्चों के नाम पर रकम मांगी जाती है। शुरुआत में छोटी रकम मांगकर लोगों को भुगतान के लिए तैयार किया जा सकता है। इसके बाद अलग-अलग कारण बताकर बार-बार पैसे मांगे जाते हैं। लोगों को लगता है कि भुगतान करने के बाद उनके खाते में सरकारी सहायता की राशि आ जाएगी, लेकिन वास्तव में ठग उनके पैसे अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेते हैं। इसलिए किसी भी सरकारी योजना के नाम पर लाभ जारी करने से पहले शुल्क जमा करने का दबाव बनाया जाए, तो उसकी प्रामाणिकता की जांच करना बेहद जरूरी है। I4C ने फर्जी कैशबैक, स्क्रैच कार्ड और स्पिन-एंड-विन प्रतियोगिताओं के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को लेकर भी चेतावनी दी है। ऐसे मामलों में लोगों को बताया जाता है कि उन्होंने कोई नकद इनाम या कैशबैक जीत लिया है। इनाम प्राप्त करने के लिए उन्हें एक वेबसाइट खोलने या भुगतान संबंधी प्रक्रिया पूरी करने को कहा जाता है। कुछ मामलों में पीड़ितों को संदिग्ध UPI कलेक्ट रिक्वेस्ट स्वीकार करने या अपना UPI PIN दर्ज करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इससे उनके बैंक खाते से पैसे कट सकते हैं और ठगी करने वालों के पास पहुंच सकते हैं। ध्यान रखें: UPI PIN पैसे भेजने या भुगतान को अधिकृत करने के लिए होता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं। इनाम या सरकारी सहायता मिलने के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपना PIN दर्ज न करें। I4C की चेतावनी में अंतरराष्ट्रीय फोन नंबरों से आने वाली संदिग्ध कॉल का भी उल्लेख किया गया है। कुछ लोगों को पाकिस्तान के कंट्री कोड +92 से शुरू होने वाले नंबरों से फोन या संदेश मिलने की जानकारी सामने आई है। कॉल करने वाले व्यक्ति यह दावा कर सकते हैं कि किसी सरकारी योजना के तहत उनका चयन हुआ है और उन्हें बड़ी रकम मिलने वाली है। इसके बाद लाभ जारी करने के लिए शुल्क, बैंक विवरण या अन्य संवेदनशील जानकारी मांगी जा सकती है। हालांकि, केवल किसी विदेशी कंट्री कोड से फोन आने के आधार पर किसी कॉल को अपराध से जुड़ा हुआ नहीं माना जा सकता। असली खतरे की पहचान कॉल में किए गए दावों, पैसे की मांग और निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश से करनी चाहिए। किसी भी सरकारी अधिकारी की पहचान की पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से करें। साइबर ठगी से बचने के लिए I4C ने लोगों को निजी और वित्तीय जानकारी की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। सरकारी योजनाओं की जानकारी संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जांचें। सोशल मीडिया पर दिखने वाले वीडियो और विज्ञापनों को बिना पुष्टि के सच न मानें। अनजान लोगों के साथ आधार नंबर, पैन, बैंक विवरण, OTP या UPI PIN साझा न करें। किसी योजना के नाम पर मांगी जाने वाली फीस और भुगतान प्राप्तकर्ता की जांच करें। UPI भुगतान स्वीकार करने से पहले स्क्रीन पर दिखाई जा रही रकम और प्राप्तकर्ता का विवरण ध्यान से पढ़ें। सरकारी अधिकारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति की पहचान आधिकारिक माध्यम से सत्यापित करें। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या अनजान वेबसाइट पर बैंक संबंधी जानकारी भरने से बचें। यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है, तो उसे बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा, भारत सरकार के आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। आधिकारिक पोर्टल: https://www.cybercrime.gov.in जल्दी शिकायत करने से संबंधित बैंक और जांच एजेंसियों को संदिग्ध लेनदेन पर कार्रवाई करने का अवसर मिल सकता है। पीड़ित को भुगतान की रसीद, ट्रांजैक्शन आईडी, फोन नंबर, संदेश और उपलब्ध स्क्रीनशॉट जैसे साक्ष्य सुरक्षित रखने चाहिए। सरकारी योजनाओं के नाम पर फर्जी विज्ञापन, डीपफेक वीडियो, नकली कैशबैक ऑफर और संदिग्ध फोन कॉल के जरिए साइबर अपराधी लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। I4C की चेतावनी का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को ऐसे जाल में फंसने से बचाना है। किसी भी सरकारी सहायता का लाभ लेने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करें। याद रखें कि किसी वीडियो में प्रधानमंत्री, मंत्री या मुख्यमंत्री का चेहरा दिखाई देना इस बात का प्रमाण नहीं है कि विज्ञापन असली है। सतर्कता, सही जानकारी और समय पर शिकायत ही ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं।फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी विज्ञापनों का इस्तेमाल
रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर वसूली
स्क्रैच कार्ड और स्पिन-एंड-विन ऑफर से भी ठगी
+92 से शुरू होने वाले विदेशी नंबरों से कॉल पर सतर्क रहें
आधार, पैन, बैंक विवरण और OTP साझा करने से बचें
ठगी होने पर कहां करें शिकायत?
निष्कर्ष
सरकारी योजनाओं के नाम पर साइबर ठगी का खतरा, I4C ने जारी की चेतावनी; डीपफेक वीडियो और विदेशी नंबरों से लोगों को बनाया जा रहा निशाना






