आज के खास दिन का महत्व: आज जया एकादशी है माघ शुक्ल एकादशी को जया एकादशी कहते हैं। पद्म
पुराण के अनुसार, यह व्रत ब्रह्महत्या जैसे महापाप को भी नष्ट करने की
शक्ति रखता है। इंद्र की सभा में शाप के कारण पिशाच बने माल्यवान और
पुष्पवती को इसी व्रत के प्रभाव से मुक्ति मिली थी और वे पुनः स्वर्ग
प्राप्त कर सके। इसलिए यह व्रत बुरी आत्माओं के प्रभाव और नकारात्मक ऊर्जा
को घर से दूर करने के लिए श्रेष्ठ है। मृगशिरा नक्षत्र और गुरुवार का संयोग: ज्योतिष
शास्त्र में गुरुवार और मृगशिरा नक्षत्र का मिलन एक अत्यंत सौम्य और शुभ
संयोग माना जाता है। गुरुवार के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं जो ज्ञान,
धन और विस्तार के कारक हैं। वहीं, मृगशिरा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं,
लेकिन इसके अधिष्ठाता देवता चंद्रमा हैं। मृगशिरा का प्रतीक हिरण का सिर
है, जो " सर्चिंग , चंचलता और सौंदर्य का प्रतिनिधित्व करता है। यह
दिन विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए सर्वोत्तम
है। मृगशिरा की ढूंढने की प्रवृत्ति को गुरुवार सही दिशा देता है। यदि
आप किसी नए विषय की पढ़ाई शुरू करना चाहते हैं या किसी गहरे प्रश्न का उत्तर
खोज रहे हैं, तो आज का दिन सफलता दिलाता है। मृगशिरा नक्षत्र यात्रा का
कारक है। गुरुवार के साथ मिलकर यह धार्मिक यात्रा या तीर्थ दर्शन के लिए
बहुत शुभ योग बनाता है। इस दिन शुरू की गई यात्रा आनंददायक और ज्ञानवर्धक
होती है। मृगशिरा नक्षत्र यात्रा का कारक है। गुरुवार के साथ मिलकर यह
धार्मिक यात्रा या तीर्थ दर्शन के लिए बहुत शुभ योग बनाता है। इस दिन शुरू
की गई यात्रा आनंददायक और ज्ञानवर्धक होती है। आज का विशेष उपाय: आज जया एकादशी है। भगवान विष्णु को पीले फूल और केले का भोग लगाएं। साथ ही तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।
आज के दिन विशेष रूप से ज्यादा से ज्यादा ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें।
गुरुवार
और एकादशी के संयोग में पीपल के पेड़ में जल चढ़ाना और शाम को घी का दीपक
जलाना पितरों को तृप्त करता है और कर्ज से मुक्ति दिलाता है।
आज पक्षियों को दाना डालें या किसी गौशाला में हरा चारा दान करें।
आज नहाने के पानी में चुटकी भर हल्दी डालें और माथे पर भी हल्दी का तिलक लगाएं।
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रांची: आज गुरुवार, 29 जनवरी 2026 का दिन भगवान विष्णु की आराधना और मोक्ष
प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम है। आज माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि
है, जिसे जया एकादशी के नाम से जाना जाता है।
मान्यता है कि इस एकादशी का
व्रत करने से व्यक्ति को ब्रह्महत्या जैसे पापों और पिशाच योनि से मुक्ति
मिलती है। आज सुबह 07:32 बजे तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा, जो स्थिरता देता है,
और उसके बाद मृगशिरा नक्षत्र लग जाएगा।
मृगशिरा नक्षत्र के स्वामी मंगल
हैं और देवता चंद्रमा हैं। गुरुवार और एकादशी का यह महासंयोग जीवन में
सुख, सौभाग्य और पाप मुक्ति के लिए अत्यंत फलदायी है। मृगशिरा नक्षत्र
खोज और सौंदर्य का प्रतीक है, इसलिए आज आध्यात्मिक खोज के लिए दिन शुभ
है।
गुरुवार को राहु काल दोपहर 01:46 बजे से 3:09 बजे के बीच होता है। एकादशी
के दिन राहु काल में व्रत पारण या पूजा का आरंभ नहीं करना चाहिए।







