उत्तरकाशी, 06 फरवरी (हि.स.)। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के प्रावधानों को यथावत बनाए रखने और इस कानून को और मजबूत करने की मांग को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने प्रदर्शन किया और उप जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। शुक्रवार को जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप रावत के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने कलेक्टर के प्रतिनिधि उप जिलाधिकारी डुंडा देवेन्द्र शर्मा को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। छह सूत्री ज्ञापन में कहा गया कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि गरीबों, मजदूरों और किसानों के आत्मसम्मान से जुड़ा अधिकार है। ज्ञापन में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के मूल प्रावधानों को बरकरार रखने की मांग की गई। कांग्रेस पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार नाम बदलने और बजट में कटौती के जरिए पंचायतों की शक्ति कमजोर करना चाहती है। उनका कहना था कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है और इसमें किसी भी प्रकार की कटौती से उन्हें बेरोजगारी का सामना करना पड़ सकता है। ज्ञापन में न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन निर्धारित करने तथा मजदूरी का भुगतान अधिकतम 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने की मांग की गई। साथ ही तकनीकी कारणों से श्रमिकों के जॉब कार्ड या कार्य मांग को निरस्त न करने की बात भी कही गई। इस अवसर पर पूर्व जिलाध्यक्ष मनीष राणा, शीशपाल पोखरियाल, विक्रम सिंह रावत, कमल सिंह रावत, संदीप नौटियाल, सुधीश पंवार, विश्वास रावत, मनोज पंवार, उत्तम सिंह गुसाईं, एकादशी, राखी राणा, मनोज मिनान, प्रदीप भट्ट सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इससे पहले जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में मनरेगा बचाओ अभियान के तहत ग्राम सिरी के ढुंग कस्बे में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों और मनरेगा श्रमिकों ने भाग लिया।
मनरेगा बचाने की मांग को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन






