काठमांडू: नेपाल और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय श्रम समझौते पर
हस्ताक्षर किए गए हैं। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में सामान्य श्रमिकों के
लिए सुरक्षित, व्यवस्थित और सम्मानजनक वैदेशिक रोजगार को बढ़ावा देने के
उद्देश्य से यह समझौता संपन्न हुआ। समझौते पर नेपाल की ओर से श्रम,
रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री राजेन्द्र सिंह भण्डारी तथा सऊदी अरब
सरकार की ओर से मानव संसाधन एवं सामाजिक विकास मंत्री अहमद बिन सुलेमान
अल-राजी ने हस्ताक्षर किया है।
समझौते पर हस्ताक्षर से पहले दोनों
देशों के श्रम मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई। इस दौरान मंत्री
भण्डारी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता नेपाल–सऊदी अरब के बीच श्रम
सहयोग को और अधिक संस्थागत व सुदृढ़ बनाएगा। उन्होंने कहा कि यह
समझौता नेपाली सामान्य श्रमिकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, न्यायोचित
और लागत-प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा। साथ
ही, इससे सऊदी अरब में कार्यरत नेपाली श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और
रोजगार सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
फिलहाल सऊदी अरब में कार्यरत कई
नेपाली श्रमिक न्यूनतम वेतन न मिलने, अनुबंध बदल दिए जाने, कंपनी द्वारा घर
न जाने देने, तथा इलाज में लापरवाही जैसी समस्याओं को लेकर दूतावास और
वैदेशिक रोजगार विभाग में शिकायत दर्ज कराते रहे हैं। वैदेशिक
रोजगार विभाग के आंकड़ों के अनुसार, आर्थिक वर्ष 2024-25 में 1,52,557
नेपाली नागरिकों ने (पुनः श्रम स्वीकृति सहित) सऊदी अरब के लिए श्रम
स्वीकृति प्राप्त की थी। वहीं, इससे पूर्व आर्थिक वर्ष 2023/24 में यह
संख्या 1,41,502 थी।
यह समझौता एक दशक से अधिक समय के
प्रयास के बाद संभव हो सका है। नेपाल 1993 साल से ही सऊदी अरब के साथ श्रम
समझौता करने के प्रयास में था। इस दौरान कई बार समझौते का मसौदा तैयार किया
गया। गत वर्ष 29 अगस्त को हुई मंत्रिपरिषद बैठक ने इस पर हस्ताक्षर के लिए
स्वीकृति दी थी, लेकिन 8 और 9 सितंबर को हुए ‘जेनजी आंदोलन’ के कारण सरकार
गिरने से इसमें देरी हो गई।
रियाद स्थित नेपाली दूतावास ने
विश्वास जताया है कि इस समझौते से सऊदी अरब में कार्यरत तथा भविष्य में
रोजगार के लिए जाने वाले नेपाली श्रमिकों की सेवा सुविधाएं, सुरक्षा और
स्थायित्व और अधिक मजबूत होंगे।







