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बिहार दारोगा बहाली आंदोलन की आड़ में राजनीतिक साजिश?उठने लगे गंभीर सवाल


विशेष संवाददाता 

पटना(बिहार)।बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग  की परीक्षाओं और हालिया दारोगा बहाली आंदोलन को लेकर अब कई तरह के गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।एक तरफ जहां अभ्यर्थियों का एक गुट गर्दनीबाग में प्रदर्शन कर परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस पूरे आंदोलन की मंशा और इसके पीछे की अदृश्य ताकतों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।

•BPSSC की विश्वसनीयता पर अकारण प्रहार?•

विशेषज्ञों और निष्पक्ष विश्लेषकों का मानना है कि बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग का रिकॉर्ड अब तक के इतिहास में बेहद स्वच्छ और पारदर्शी रहा है।आयोग द्वारा पूर्व में आयोजित कराई गई किसी भी परीक्षा पर कभी इस तरह के धांधली या पेपर लीक के आरोप नहीं लगे हैं।आयोग हमेशा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने के लिए जाना जाता रहा है।ऐसे में अचानक बिना किसी पुख्ता और ठोस सबूत के आयोग की पूरी प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाना अभ्यर्थियों की वास्तविक मांग से परे लगता है।

•TRE 4 के आंदोलन का रुख अचानक दारोगा बहाली की ओर कैसे मुड़ा?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा संशय आंदोलन के घटनाक्रम को लेकर उत्पन्न हो रहा है।शुरुआत में जो छात्र आंदोलन TRE 4 (शिक्षक नियुक्ति)की मांगों को लेकर चलाया जा रहा था,उसमें अचानक एक नया मोड़ आता है और पूरा ध्यान BPSSC तथा दारोगा भर्ती की ओर केंद्रित कर दिया जाता है।आखिर TRE 4 के मंच से अचानक आयोग को निशाने पर लेने के पीछे की पटकथा किसने लिखी?यह सवाल अब जोर पकड़ रहा है।

•तथाकथित कोचिंग संस्थानों और राजनीतिक दलों का खेल?

सूत्रों और जानकार सूत्रों के दावों की मानें तो इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कुछ प्रमुख चेहरे स्वतंत्र नहीं हैं,बल्कि वे कुछ तथाकथित कोचिंग संस्थानों के इशारे पर काम कर रहे हैं।चर्चा यह भी गर्म है कि ये कोचिंग संस्थान किसी खास राजनीतिक पार्टी के दिशा-निर्देशों पर कार्य कर रहे हैं,जिसका मुख्य उद्देश्य वर्तमान सरकार(सम्राट सरकार/प्रशासन)की छवि को धूमिल और बदनाम करना है।

यदि सरकार की खुफिया एजेंसियां इस पूरे मामले और आंदोलन के पीछे के फंडर्स व रणनीतिकारों की गहराई से जांच करें,तो "दूध का दूध और पानी का पानी" हो सकता है तथा छात्रों को ढाल बनाने वाले मुख्य चेहरों का पर्दाफाश हो सकता है।

•EOU पोर्टल की कार्यप्रणाली पर उठती भ्रांतियां•

इतना ही नहीं,आर्थिक अपराध इकाई के पोर्टल को लेकर भी भ्रम और संशय का माहौल पैदा किया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि EOU के पोर्टल पर किसी भी प्रकार की शिकायत दर्ज होते ही उसे सीधे संज्ञान में ले लिया जाता है।शिकायत की प्राथमिक सत्यता या प्रमाणिकता की बिना जांच किए ही मामले को जांच के दायरे में शामिल कर लिया जाता है।इसका फायदा उठाकर कुछ अराजक और स्वार्थी तत्व बेबुनियाद शिकायतों के जरिए पूरी परीक्षा प्रक्रिया और आयोग की छवि को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।

छात्रों के हितों की रक्षा अनिवार्य है,लेकिन आंदोलन की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने वाले संस्थानों और तथाकथित नेताओं से सतर्क रहने की जरूरत है।शासन और खुफिया एजेंसियों को इस प्रकरण की तह तक जाकर सच्चाई को सामने लाना चाहिए ताकि परीक्षार्थियों का भविष्य किसी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा की बलि न चढ़े।