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करीम सिटी कॉलेज, मानगो कैंपस के हिंदी विभाग द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर एक गरिमामय एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।


हिंदी दिवस समारोह का आयोजन

करीम सिटी कॉलेज, मानगो कैंपस के हिंदी विभाग द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर एक गरिमामय एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति रुचि, सम्मान एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना तथा हिंदी के व्यापक सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक महत्व को रेखांकित करना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. मोहम्मद ज़कारिया (डायरेक्टर एजुकेशन करीम्स ट्रस्ट  एवं सेक्रेटरी गवर्निंग बॉडी करीम सिटी कॉलेज) थे। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ सुभाष चंद्र गुप्त (अध्यक्ष हिंदी विभाग, करीम सिटी कॉलेज) उपस्थित रहे। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज़, मानगो कैंपस के प्रभारी मोहम्मद शाहनवाज़ आलम, हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. फ़िरोज़ आलम एवं प्रियंका कुमारी सहित महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों की रचनात्मक एवं बौद्धिक प्रतिभा को सामने लाने के उद्देश्य से विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें निबंध लेखन प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, स्वरचित कविता वाचन प्रतियोगिता तथा पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता प्रमुख थीं। इन प्रतियोगिताओं में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा, साहित्य, संस्कृति, समकालीन समाज तथा हिंदी की वर्तमान भूमिका से जुड़े विषयों पर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. सुभाष चंद्र गुप्त ने हिंदी भाषा के विविध पक्षों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय समाज की विविध सांस्कृतिक एवं भावनात्मक अभिव्यक्तियों को जोड़ने वाली भाषा भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी के अध्ययन के साथ-साथ उसके व्यवहारिक और रचनात्मक प्रयोग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बदलते समय और तकनीकी युग में हिंदी के सामने उपस्थित नई संभावनाओं और चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज़ ने हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए भाषा के अध्ययन को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व-विकास, विचार-अभिव्यक्ति और सामाजिक संवाद में भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने तथा इसे अपने दैनिक व्यवहार में अधिकाधिक प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।

कैंपस प्रभारी मोहम्मद शाहनवाज़ आलम ने अपने संबोधन में हिंदी को भारतीय समाज की विविधता को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा बताते हुए कहा कि किसी भी भाषा का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब नई पीढ़ी उससे सक्रिय रूप से जुड़े। उन्होंने विद्यार्थियों की सहभागिता की सराहना करते हुए ऐसे कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम में हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. फ़िरोज़ आलम ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हिंदी दिवस केवल एक दिन हिंदी को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि हिंदी के प्रति हमारी शैक्षणिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों पर विचार करने का अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी को केवल विषय के रूप में नहीं, बल्कि विचार, संवाद और सृजन की भाषा के रूप में देखने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. फ़िरोज़ आलम ने किया। उन्होंने कार्यक्रम के विभिन्न चरणों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करते हुए वक्ताओं, विद्यार्थियों एवं उपस्थित प्राध्यापकों को कार्यक्रम से जोड़े रखा। प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने पूरे आयोजन को जीवंत और सार्थक बना दिया।

अंत में विद्यार्थी मोहम्मद फ़ैज़ान ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता, प्राचार्य, कैंपस प्रभारी, सभी प्राध्यापकों तथा प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस प्रकार हिंदी दिवस का यह आयोजन भाषा, साहित्य, रचनात्मकता और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता का सुंदर समन्वय रहा। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को हिंदी के प्रति अपने जुड़ाव को अभिव्यक्त करने के साथ-साथ भाषा के वर्तमान स्वरूप, उसकी उपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं पर विचार करने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ।